छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआपको ऊपर तो मिट्टी दिखाई देगी लेकिन नीचे कठोर चट्टानें हैं। उस पर सिर पटके बिना उस पत्थर की जाति कैसे समझ में आएगी? वह जहरीला सह्याद्रि पर्वत पत्थरों का है, फौलाद का है। " "और ?" "और क्या जहाँपनाह—इसके पहले मराठों और बीजापुर के आदिलशाह के बीच कई लड़ाइयाँ हुईं। किन्तु इस समय गोलकुंडा के कुतुबशाह और बीजापुर के सिकन्दर आदिलशाह तथा सह्याद्रि के कन्धे पर सवार सम्भाजी, दक्षिण की ये शक्तियाँ दिल-दिमाग से एक हो गयी हैं। जब तक इन तीनों के आपसी बन्धन टूटते नहीं या उनमें दरार नहीं पड़ती तब तक आपकी मुराद पूरी नहीं हो सकती।"
दो
26 अप्रैल, 1684 का दिन था। शम्भूमहाराज वीरवाड़ी के किले में रुके हुए थे। अंग्रेजों और मराठों के बीच बहुत दिनों से विलम्बित एक महत्त्वपूर्ण सन्धि होने वाली थी। मराठों के वकील प्रह्लाद निराजी और अंग्रेजों के वकील स्मिथ की भागदौड़ चालू थी। पिछले कुछ महीनों मे मुम्बई के चारों ओर अपनी सेना की घेरबन्दी करके सम्भाजी ने अंग्रेजों की नाक मे दम कर दिया था। मुम्बई के अंग्रेज घबरा गये थे। उन्होंने सूरत वाले अंग्रेजों से परामर्श किया। ईस्ट इंडिया कम्पनी को अपने सूरत के अधिकारियों पर अधिक भरोसा था। इसके साथ ही वसई बिरार से लेकर गोवा तक सम्भाजी महाराज ने फिरंगियों पर दबाव डालना शुरू कर दिया था। इसके अतिरिक्त मराठों ने केलवा, दन्तोरा, सारगाँव, माहिम और सोपारा चौकियां पर क़ब्जा कर लिया था। इससे अंग्रेज बहुत भयभीत हो गये थे। चाइल्ड और वॉर्ड नामक अधिकारियों के अत्याचार से मुम्बई की जनता उनके विरुद्ध आन्दोलन कर रही थी। इस विद्रोह के कारण ही कम्पनी सरकार ने रिचर्ड केजविन की मुम्बई के गवर्नर के रूप में नियुक्ति की थी। 'रिचर्ड' के साथ सम्भाजी महाराज ने कुछ अच्छे सम्बन्ध बना लिए थे। सम्भाजी महाराज एक ओर समझौते की बात कर रहे थे किन्तु दूसरी ओर से सेना का दबाव भी बनाए जा रहे थे। गवर्नर केजविन ने अपने दो अधिकारियों, कैप्टन गैरी और थामस विल्किन्स
सम्भाजी