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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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लेना-देना है? हमें तो एक बार सिर्फ एक बार अपने पिता की गोद में सिर रखना है। भगवान शिव की तरह के अपने पितामह के रायगढ़ को देखना है।' स्वामी, राजकुमारी की देखभाल के लिए मैं और उसकी राणू बुआ पूरी तरह सक्षम हैं। कभी न कभी इस अन्धकार का पर्दा अवश्य हटेगा। उसकी इतनी क्या चिन्ता? आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। हमारे लिए जान को जोखिम में डालने की कोई आवश्यकता नहीं है। यहाँ भोजन वस्त्र की कोई कमी नहीं है। राजपरिवार के बन्दियों को सब कुछ दिया जाता है। पंच पकवान रोज ही बनता है किन्तु अपनी रसोई की रोटी का स्वाद कुछ और ही होता है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। तुलजा भवानी की कृपा से आपकी और कमलजा की भेंट कभी-न-कभी अवश्य होगी।'' उस पत्र को पढ़ते पढ़ते शम्भूमहाराज की आँखें भर आयीं। येसूबाई की आँखों से अविरल अश्रुधारा प्रवाहित थी। उन दोनों को धीरज बँधाते हुए अर्जॉजी कहने लगे—‘‘एक बात तो सत्य है महाराज, आपके परिवार को उस कारागार में खाने-पीने, रहने आदि की कोई कमी नहीं है। औरंगजेब राजबन्दियों के बाल- बच्चों का इतना ध्यान क्यों देता है? मैंने इस बात की बड़ी सूक्ष्मता से पूछताछ की। मुझे इस सम्बन्ध में जो जानकारी मिली वह कहानी बड़ी अनोखी है।'' ‘‘कौन-सी?’’ ‘‘औरंगजेब के पिता शाहजहाँ ने अपने पिता जहाँगीर के विरुद्ध बगावत का ऐलान किया था। उस समय जहाँगीर ने औरंगजेब को उसके भाइयों के साथ अपने जुन्नर में रखा था। उन दिनों उसकी दशा कुत्ते से भी बदतर हो गयी थी। उसकी स्मृति बादशाह के दिमाग मे कभी मिटी नहीं। इसीलिए वह राजबन्दियों और उनके बाल बच्चों का इतना ध्यान रखता है, उन पर दया करता है।''

चार

बादशाह के डेरे में पिछले दो-तीन दिनों से हलचल मची हुई थी। सेना को डेरे डंडे के साथ बाहर निकलने का आदेश हुआ था। इसलिए कनातों और सामानों से भरी ऊँट गाड़ियाँ, पीठ पर रसद के बोरे लादे हजारों बैल, अहमदनगर से बाहर निकल रहे थे। बादशाह ने सेना को दो दिनों के भीतर सोलापुर की दिशा में अभियान करने

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