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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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का आदेश दिया था। आलमगीर के मन में क्या योजना चल रही थी। इसका अनुमान किसी को नहीं लग रहा था। इतना स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था कि वे किसी कारण से बहुत चिन्तित हैं। दरबार में बैठा बादशाह अपने हरकारों और गुप्तचरों के पत्रों को बड़ी बारीकी से पढ़ रहा था। शहजादा आजम की सेना बीजापुर क्षेत्र में उधम मचा रही थी। उसने नागोठणे के किले को घेर लिया था। शेख उल इस्लाम साहब को दक्षिण के दोनों राजाओं को बादशाह का क्रोध पसन्द नहीं था। शिया हो या सुन्नी, दोनों अल्लाह के बच्चे हैं। आज बादशाह संतृप्त था फिर भी उसके चेहरे पर चमक थी। शेख साहब ने यह देखते हुए साहस करके कहा, "किबलाए आलम, आखिर तो बच्चे ही हैं। उनकी बात को मन पर इतना क्यों लेना?" "कौन बच्चे हैं?" जहाँपनाह, वह हैदराबाद का कुतुबशाह एक अय्याश है और बीजापुर के सिकन्दर आदिलशाह की उम्र अभी पन्द्रह सोलह की" बौखलाये बादशाह ने शेखसाहब से स्पष्ट शब्दों में कहा "इन दोनों को नष्ट करने से ही मराठों की कमर हमेशा के लिए टूटेगी। मैसूर का चिक्कदेवराज इस प्रकार की सूचना मुझे बार बार दे रहा है। इसके अतिरिक्त इन दोनों की उम्र से हमें कुछ लेना देना नहीं है। उनकी मूर्खता और मूर्खता की राजनीति खुदा को भी पसन्द नहीं आएगी। हैदराबाद गोलकुंडा का वह शाह भरे दरबार में सारंगी बजाता है, सुनने वालों से वाहवाही लूटता है। हर शुक्रवार को चारमीनार चौक पर बीस हजार लड़कियाँ, बाजारू औरतें, नर्तकियों को इकट्ठा करके नचाने गवाने का नंगा नाच करता है। वह प्रजा की और खुदा की सेवा कैसे करेगा?" बादशाह को अचानक कुछ याद आया। उसने तुरन्त बरामदखान को बुलवाया, "बरामद, इसके पहले हमने उस बदमाश आदिलशाह के सामने अपनी कुछ माँगें रखी थीं। उसका कोई जवाब आया कि नहीं?" बरामदखान घबरा गया। बादशाह शेख उल इस्लाम की भाव भंगिमा का निरीक्षण करने लगा। खान से आदिलशाह का कटु जवाब पढ़ा नहीं जा रहा था। बादशाह की भौंहें टेढ़ी हो गयीं। खान घबराकर पत्र पढ़ने लगा- "बीजापुर के क्षेत्र में नयी चौकियाँ बनाने की इजाजत क्यों माँग रहे हो? इसके पहले बिना हमारी इजाजत के तुमने बना ली हैं उन्हें तुरन्त नष्ट कर दो। शाहंशाह को यदि सम्भाजी पर चढ़ाई करनी है तो खुशी-खुशी अपने या सम्भाजी के क्षेत्र से होकर जाएँ। उसके लिए हम अपने क्षेत्र की डेढ़ बीता जमीन भी देने वाले नहीं हैं। इसके अतिरिक्त शिवाजी और सम्भाजी का प्रदेश भी मूलरूप से आदिलशाह का ही है इसलिए सम्भाजी :: 519