छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 552, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंलगभग खींचते हुए वहाँ से दूर ले गये। वह सारा दल बादशाह के सामने घुटने टेककर प्रार्थना करने लगा, "बादशाह सलामत ! आप एक पाक मुसलमान हैं। एक जीवित पीर मानकर लोग आपका गौरव करते हैं। कुरान के हुक्म के बिना आपकी पलकें भी नहीं झपकतीं।" "आपको क्या चाहिए ? उतनी ही बात करो, काजी।" बादशाह ने गिने चुने शब्दों में कहा। "शहंशाह, गुस्ताखी माफ, यह युद्ध नापाक है। इतने बड़े दिल्ली के बादशाह, एक छोटे से इस्लामी राज्य और वहाँ की गरीब प्रजा का इतना नुकसान क्यों कर रहे हैं? हजरत हम सब आपके भाई हैं।" "काजी, कौन किसका भाई?" सन्तप्त औरंगजेब की आँखों की पुतलियाँ सुई की नोक की तरह नाचने लगीं। सभी की नजरें नीचे झुक गयीं। "आप सभी इस्लाम के रखवाले दिखाई पड़ते हैं। एक बात बताइए, वह शिवाजी का बदमाश लौंडा, वह काफिर सम्भा तुम्हारा भाईबन्द कब से बन गया?" "लेकिन जहाँपनाह - ?" सभी हड़बड़ा गये। "तुम दक्षिण के सभी लोग जानते हो। पहले कहाँ था मरगठों का हिन्दवी स्वराज्य ? उस जमींदार शिवा ने और उसके मूर्ख लड़के ने, सम्भा ने आदिलशाह के राज्य का कुछ हिस्सा निकालकर, थोड़ा निजामशाही से निकालकर मरगठों की नापाक सल्तनत कायम कर ली।" "हजरत, गनीमों की वह कार्यवाही हमें कभी मंजूर न थी।" उलेमा ने कहा। "ऐसा है तो मराठों की फौज को पिछले दिनों बीजापुर के रास्ते पर गाजे- बाजे के साथ क्यों लेकर गये। उनका बारात की तरह सम्मान क्यों करते हो?" "सिकन्दर आदिलशाह नासमझ है हुजूर। उसे माफ करें।" "यह कैसी नासमझी ? वह सम्भाजी और कुतुबशाह के साथ गुप्त समझौते करता है। हमारे कहने पर भी सर्जाखान को अपनी फौज से निकालने से साफ इंकार करता है। ऐसा बेमुरव्वत जवाब हिन्दुस्तान के बादशाह को देता है। इस सारे बेवकूफी वाले व्यवहार को आप नासमझी कहते हैं ? उधर पन्हाला पर जाइए। अपने बाप उस सम्भा के पैर पर सिर पटकिए।" "लेकिन हजरत फिर भी हमारी एक प्रार्थना है। सारा कुरान शरीफ तो जिल्लेसुभानी की जबान पर है। हम मुल्ला-मौलवियों का अध्ययन भी उतना नहीं है जितना आपका है। आप मेहरबानी करके एक ही सवाल का जवाब दें।" बादशाह ने उनकी ओर प्रश्नसूचक दृष्टि से देखा। "बताइये जहाँपनाह, एक इस्लामी सत्ता को दूसरी इस्लामी शासन व्यवस्था पर हथियार उठाना कुरान शरीफ 550 :: सम्भाजी