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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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निद्रा किसी मुक्त पंछी की तरह कहीं दूर भाग गयी थी। ऐसा कुछ घटित होगा, इसका अनुमान शम्भूराजा को बिलकुल न था। वैसे भी शम्भूराजा के लिए कर्नाटक प्रदेश कुछ नया नहीं था। छोटी उम्र में ही उनको कोलार और चिक्कबालपुर की जागीरदारी दी गयी थी। इस कारण उनका दक्षिण में बहुत बार आना-जाना हुआ था। अभी चार दिन पहले ही पिता-पुत्र में विचार विमर्श हुआ था कि दक्षिण में जाकर क्या-क्या करना है। उसी समय अपने पिता शाहजी राजा का नाम बड़े अभिमान से लेकर शिवाजी महाराज ने कहा था, "शम्भू बंगलूर की जागीर मेरे पिताजी के अधिकार में थी। आज उस नगर का जो वैभव और ठाट-बाट है, उसमें उनका बड़ा हाथ है।" "जी, पिताजी।" "किन्तु उनके बाद मेरे सौतेले भाई एकोजी राजा से एक बड़ी भूल हो गयी। उन्होंने अपना प्रशासन केन्द्र बंगलूर से हटाकर नीचे तंजौर को बनाया।" "किन्तु पिताजी मैंने सुना है कि तंजौर, त्रिचनापल्ली और जिंजी की ओर प्रदेश बहुत उर्वर और कृषि की दृष्टि से समृद्ध है।" "वह सच है। किन्तु एकोजी राजा के सुदूर दक्षिण डेग जमाने से विगत तीन चार वर्षों मे मैसूर का राजा चिक्कदेव बहुत धृष्ट होता जा रहा है। अपने दक्षिण के कर्नाटक और तमिल प्रदेशों से जो कुछ प्राप्त होता है उसके कारण उसे भी खतरा पैदा हो गया है। एक न एक दिन आपको उसका भी सामना करना पड़ेगा। उसकी व्यवस्था करनी होगी।" ये सारी बातें शम्भूराजा को रह रहकर स्मरण हो रही थीं। शम्भूराजा बहुत देर तक वैसे छटपटाते रहे। थोड़ी देर बाद उन्हें गहरी नींद आ गयी, वे जोर जोर से खर्राटे भरने लगे। उनके क्रुद्ध मन और क्लान्त शरीर की येसूबाई को पूरी जानकारी थी। वे सारी रात बिस्तर का एक कोना पकड़े युवराज के सिर के पास बैठी रहीं। उनकी आँखों का चिराग सारी रात लगातार जलता रहा। पाँच शम्भूराजा के महल पर शोक की गहरी छाया घिर आयी थी। युवराज को प्राणों से भी अधिक प्यार करने वाले कवि कलश, जांत्याजी केमरकर, कृष्णाजी कंक जैसे 56 सम्भाजी