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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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कृपा हुई है, राजन! जिंजी से बड़ी अच्छी खबर आयी है। " "कौन सी कविराज ?" "हरजी राजा ने तीन हजार बैलों पर लादकर धन और अनाज भेजा है। पन्द्रह दिन पहले ही लोग वहाँ से बैलों को लेकर चल चुके हैं।" "अच्छा हुआ।" महाराज प्रसन्न हो गये। बड़े सन्तोष के साथ उन्होंने कहा, "हरजी शूरवीर और होशियार हैं। यहाँ की अकाल और अभाव की खबरों को सुनकर उनकी आँखें खुल गयी होंगी। कुछ भी हो जो हुआ अच्छा ही हुआ। दो चार दिन ही बीते थे कि कृष्णाजी कोन्हेरे कवि कलश और शम्भूजी महाराज के पास दौड़ते हुए आये। अपने कन्धे के उत्तरीय को झटकते हुए कहने लगे, "पत्र आया है, अथणी से, दिगोजी निंबालकर की खबर कुछ अच्छी नहीं है।" शम्भू महाराज और कवि कलश ने आँखें उठाकर कोन्हेरे की ओर देखा। कोन्हेरे ने कहा, "जिंजी से पीठ पर धनधान्य लादे बैल जत के मैदान में पहुँच गये। वहाँ बादशाह की फौज ने उन्हें लूट लिया। परन्तु दिगोजी पन्त का कहना है कि सम्भव है कि बैलों को हाँकने वाले रास्ता भूलकर बादशाह की फौज में पहुँच गये होंगे।" शम्भू महाराज ने इस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। दो दिन बाद ही हरजी राजा का पत्र आया। उन्होंने लिखा था, "अनाज पहुँचा या नहीं कृपया इसी हरकारे से शीघ्रातिशीघ्र सूचित करें। कवि कलश ने आश्चर्य से पूछा, "राजन गलती किससे हुई? आदमियों से या बैलों से ?" उदास भाव से हँसते हुए शम्भू महाराज ने कहा, "कविराज तीन हजार बैलों को हाँकने वाले कितने रहे होंगे ?" "कम से कम साठ सत्तर।" "हरजी के ही न ?" "नहीं तो और किसके ?" "फिर उसका दोष उन चौपाए जानवरों को क्या दिया जाय ? दो पैर वाले के दिमाग से निकली यह कोई योजना है।" "मतलब ?" "मैं पहले से ही कहता आया हूँ कि हमारे हरजी 'जीजा जितने बहादुर हैं, उतने ही चालाक भी। यह योजना तो उनकी पहले से बनी बनाई है।" "वह कैसे ?" "हमें रसद भेजने की सूचना देकर उसी समय रसद जानबूझकर औरंगजेब के पास भेज दी गयी। भविष्य में अगर हमारे दुर्भाग्य से बादशाह की विजय हुई तो सम्भाजी :: 597