छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअपनी आँख ही नहीं खोल सका।" दो दिन में ही पन्हाला से गणोजी शिर्के आये। आते ही उन्होंने बादशाह के पैर पकड़ लिए। जिस प्रकार घर के किसी बड़े बुजुर्ग के मिलने पर उसके गले लगकर कोई अपने ऊपर हुए अन्याय का दुखड़ा रोकर मन हल्का करता है। उसी प्रकार गणोजी बहुत देर तक बोलते रहे। उसके बोलते हुए बादशाह बड़ी होशियारी से उससे जानकारी प्राप्त कर रहा था। पन्हाला, विशालगढ़, मलकापुर, करहाड़, पीछे की सह्याद्रि की घाटी, जंगली रास्ते जैसी अनेक बातें पूछ रहा था। सम्भाजी और कवि कलश ने उसकी जिन्दगी किस तरह तबाह की, इसकी सारी कहानी गणोजी सुना गया। उसकी कहानी ध्यान से सुनते हुए बादशाह ने कहा, "गणोजी तुम नेक इन्सान हो, काम के आदमी हो, योग्य हो, किन्तु तुम्हारे पास कोई बड़ी फौज नहीं है।" बादशाह की इस जानकारी से गणोजी चौंक गया। किन्तु तत्काल अपने को सँभालते हुए बोला, "बादशाह सलामत, मेरे स्वामी, जैसा आप कह रहे हैं, वैसी फौजी शक्ति न होने से मैं सामने से वार नहीं कर सकता किन्तु अपने हाथ की छोटी खंजर से पीठ में ऐसा घाव करूँगा कि एकाध राज्य भी रसातल का चला जा सकता है।" "वाह गणोजी, अरे आपके जैसे नेक और बहादुर व्यक्ति को अपने जमाई के रूप में ऐसे ही थोड़े चुना होगा, शिवाजी ने।" बादशाह ने वस्त्र और आभूषण देकर गणोजी का सम्मान किया। उनके साथ दो दिन तक विचार विमर्श किया। गणोजी के विदा होते समय जितनी चाहिए उतनी जागीर देने का आश्वासन देकर बादशाह ने बल देकर कहा, "हमारे शहजादे आजम साहब से तो तुम मिले ही हो। पन्हाला की ओर आते जाते रहिये। किसी चीज की जरूरत हो तो आजम साहब से बेहिचक माँग लीजिए।" "बड़ी कृपा की आपने, बादशाह सलामत।" "आप चिन्ता न करें। आपके पन्हाला पहुँचने के पहले ही आजमसाहब के पास हमारा सन्देशा पहुँच जाएगा।"
सात
कवि कलश शम्भू महाराज को एक खुशखबरी सुनाने लगे, "समय पर भगवान की 596 :: सम्भाजी