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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 597, कुल 793 में से

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गोलकुंडा को ध्वस्त कर दिया। बीजापुर के आदिलशाह की नाक में पानी भर दिया। अब उनकी तलवार के नीचे पापी और घमंडी सम्भाजी का भी बेड़ा गर्क होने वाला है। इसलिए इस खानदानी मराठा महादजी की शिवाजी के जामाता की आप सभी से प्रार्थना है कि आप सभी अपने औरंगजेब की सेवा में प्रस्तुत हो जायँ और अपनी सात पीढ़ियों का उद्धार करें।'' सीधे युद्ध में जाने से महादजी घबरा रहे थे। इसलिए बादशाह कुछ रुष्ट हुआ। रात को उसने असदखान से गम्भीर होकर बोला, "असदखान, पिछले अनेक वर्षों से मैं इस दक्षिण में जड़ जमाकर बैठा हूँ। मैंने मराठों को अच्छी तरह पहचाना है। वजीरे आजम बताइये, इन मराठों की कितनी जातियाँ हैं?" "जहाँपनाह! छियानबे या बानबे, ऐसा कुछ ये लोग बकते रहते हैं।" "नहीं असदखान, मेरे विचार से मराठों की सिर्फ दो ही जातियाँ हैं—एक मांडलिक मराठा, दूसरे मर्द मराठा। जिन्होंने पहले से कुतुबशाह, निजामशाह जैसा मालिक खोज लिया, उनकी सहायता से जागीर, महल संस्थान बनाकर, शानशौकत की जिन्दगी बिताते आ रहे हैं, वे मांडलिक मराठे हैं। किन्तु जो जागीर के लिए नहीं बल्कि अपने देश धर्म के लिए वर्षा धूप सहकर अपनी जिन्दगी दाव पर लगाते हैं, वे मर्द मराठे हैं। ये शिवा और सम्भा मर्द मराठों के सरताज हैं।" "जहाँपनाह, जो अपने दोस्त बने हैं उनकी तारीफ करने की जगह आप उन्हीं को दोष दे रहे हैं?" "वजीरे आजम, वे काहे के हमारे दोस्त? वे जागीर के टुकड़ों के दोस्त हैं। उनमें हमारा फायदा हो रहा है। यह अलग बात है?" "तो क्या जहाँपनाह सम्भा से दोस्ती करना चाहते हैं?" असदखान ने आँखों को सिकोड़ते हुए सीधा प्रश्न किया। "वजीरे आजम एक डेढ़ वर्ष पहले, जब गोलकुंडा का कुतुबशाह पूरी तरह हमारे कब्जे में आ गया था, उस समय उसकी और सम्भा की गुप्त दोस्ती का हमें पता था। कुतुबशाह की सहायता से मैंने सम्भा के पास दोस्ती का पैगाम भेजा था। सोचा लाखों की फौज लेकर इस बुढ़ापे में कितने वर्षों तक भटकता रहूँ?" असदखान ने अपने मन की बात भीतर ही दबाकर पूछा, "हजरत आपने सम्भा से क्या माँगा था?" "उसके सभी बड़े किले। उसके बदले में हम सम्भा को जितनी चाहिए उतनी जागीर देने वाले थे, लेकिन मैदानी भाग की।" "सम्भा ने क्या जवाब दिया?" "क्या देगा?" बादशाह का स्वर कटु हो गया, उसने कहा, "समझौते का पैगाम लेकर गये वकील के मुँह पर इतने जोर से थूका कि वकील बहुत देर तक सम्भाजी :: 595

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