छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 601, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंअँधेरे का फायदा उठाकर चार-पाँच भाग गये। इनका लिबास गोसाइयों और फकीरों का है, मगर ये पेशे से फौजी हैं। एक एक के शरीर में दस दस आदमी की ताकत है।‘‘ बादशाह ने अपनी जप माला को सीने मे लगाते हुए पूछा, ‘‘और इन लोगों का मकसद?’’ मंसूरखान हड़बड़ा गया। वह अन्य उपस्थित लोगों की ओर देखने लगा। तब बादशाह ने सभी को बाहर जाने के लिए आँखों मे संकेत किया। गुप्तचर, नौकर, मेहमान सभी बाहर चले गये। उन आठ लोगों पर औरंगजेब ने एक बारीक नजर डाली और तुरन्त मंसूरखान से पूछा, ‘‘इन लोगों का मकसद?’’ ‘‘आपकी मौत। जहाँपनाह।‘‘ ऐसा कहते हुए खान ने अपना सिर नीचे झुका लिया। मंसूरखान ने मराठों की इस टोली को पहले ही बहुत पीटा था। उनके शरीर पर अनेक घाव दिख रहे थे। किन्तु उनकी आँखों में तेज था। उनके बारे में बादशाह ने खास पूछताछ की-‘’मंसूरखान फौज में इनका ओहदा क्या था? सरदार सूबेदार?’’ ‘‘नहीं हुजूर, साधारण सैनिक। किन्तु इनके पद की अपेक्षा इनका मकसद बहुत ही खतरनाक था। आपको बीच ही में कहीं पर फँसाकर कत्ल कर देने का इनका इरादा था। इसीलिए ये यहाँ आये थे।‘‘ औरंगजेब ने सकट के एक और विषैले घूँट को पी लिया। अपने पर काबू करते हुए, उसने एक फौजी संन्यासी से प्रश्न किया, ‘‘क्यों जवाँमर्द सम्भा ने तुम्हें क्या हुक्म दिया था?’’ बिना एक क्षण का विलम्ब किये वह तरुण बोला, ‘‘महाराज ने हमसे इतना ही कहा था। औरंगजेब हमारे देश, धर्म और ईश्वर के लिए सकट हैं। वह जहाँ भी और जिस रूप में मिले उसे वहीं और उसी रूप मे खत्म कर दो।‘‘ औरंगजेब मन्द हँसी हँसकर मंसूरखान से पूछने लगा, ‘‘अथणी के देवालय मे सम्भा के दूसरे साथी भाग गये थे क्या?’’ ‘‘नहीं नहीं जहाँपनाह! इतना ही नहीं है।‘‘ खाँसते और गला साफ करते हुए मंसूर ने कहा, ‘‘अपनी जान की बाजी लगाकर आपका खात्मा करने के लिए ऐसी दस बारह टोलियाँ, जत, अथणी, पंढरपुर, मंगलवेढ़ा आदि क्षेत्रों में घूम रही हैं।‘‘ मंसूरखान का आखिरी वाक्य तपती सलाख की तरह घूम गया। प्रयत्न करने पर भी वह अपने चेहरे की भीति रेखा को छुपा नहीं पाया। वह सन्तप्त होकर बोला, ‘‘जिस समय वह बदमाश हंबीरराव मरा, उस समय लगा था कि सम्भा झुक
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