छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 602, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंजाएगा। जब काफिरों की सहायता करने वाली कुतुबशाही और आदिलशाही का खात्मा किया था, तभी भी ऐसा ही लगा था। लेकिन—लेकिन—" बादशाह की बात अधूरी ही रह गयी। उस दिन बादशाह ने अपना लालबारी का दरबार जल्दी ही समाप्त कर दिया। संकटों के आघात को मनुष्य झेल सकता है, किन्तु जब समय ही आघात करने लगे तो मनुष्य का अपने ऊपर से विश्वास उठने लगता है। बीजापुर की महामारी झेलकर और अपनी पचहत्तर हजार सेना गँवाकर भी बादशाह बड़े उत्साह और हिम्मत से आगे बढ़ा था। किन्तु उसका नसीब ही धोखा दे रहा था। पन्हाला की ओर से शहजादे आजम से कोई समाचार नहीं मिल रहा था। मराठों ने सर्जाखान, शहाबुद्दीन, पोलादखान, बरामदखान जैसे बहादुरों को वहीं उलझा रखा था। उसी में राजाराम को पकड़ने की खतरनाक कोशिश भी नाकाम हो गयी थी। धन का अभाव, रसद का अभाव, उत्तर से सहायता का निरन्तर कम होते जाना, दक्खिन में जगह-जगह अकाल, अन्तिम सफलता न मिलने से हताश होती फौज, उद्धत होते सवार-सरदार, मनोबल और धीरज खो चुकी फौज और ऊपर से वह कौड़ी कबरी का खेल!'' बादशाह के दिमाग में किसी ने कौड़ी-कबरी का जालिम खेल भर दिया था। उससे भी अधिक मंसूरखान द्वारा ले आये गये अथणी के वे कैदी उसे आतंकित कर रहे थे। सम्भा द्वारा इधर भेजी गयी टोलियाँ और उनके द्वारा कही गयी वह हकीकत। लगता है वह काफिर का बच्चा अपनी गर्दन पर बैठा है। बादशाह सारी रात छटपटाता रहा। डेरे की कनात के पास हवा से यदि कोई पत्ता खड़का या घोड़े के पाँव से हल्की-सी आवाज हुई तो बादशाह घबराकर उठ जाता था। किस नदी के किनारे अपनी कब्र बनाई जाएगी? मेरी जान लेने के सम्भा के द्वारा भेजे गये शैतान यहाँ कैसे आ पाएँगे? इसी प्रकार की शंकाओं ने बादशाह को पागल बना दिया था। आँखों के सामने हीराबाई, पानी के बिन तड़पता शाहजहान, रक्त से सना दारा का सिर नाच रहा था। दक्खिन का सह्याद्रि छाती पर टूटता हुआ सा प्रतीत हो रहा था। बड़े सवेरे ही बादशाह को तेज बुखार चढ़ा। उदयपुरी बेगम उसका सिर पकड़कर पास ही बैठी थी। किसी भी उपाय से बुखार उतर नहीं रहा था। किन्तु हकीम ने बताया था कि वह प्लेग का बुखार नहीं है। यह जानकर सभी की जान में जान आयी। बुखार से तड़पते बादशाह के कानों में किसी की आवाज आयी। "मुकर्रबखान उस ओर सांगोला के समीप आया है।" बादशाह ने तुरन्त उसके पास हरकारा भेजा। दूसरे दिन दुर्बल बादशाह अपने बिस्तर में पड़ा था। कनात की खिड़कियों से 600 :: सम्भाजी