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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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उद्घोष एक सन्ध्या समय शीतल बयार चल रही थी। केर्ल्या के पठार पर मुकर्रबखान का पड़ाव पड़ा था। तम्बू के द्वार पर मशालें भकभका रही थीं काले भुजंग से मशालची मशालों में तेल भरते जा रहे थे। ऊँट और घोड़ों को दो दिनों के बाद विश्राम मिला था। वे गीला सूखा जो भी चारा मिला उसे चबा रहे थे। अपने खूँटे के चारों ओर घूम कर पूँछ झाड रहे थे या जुगाली कर रहे थे। छावनी के मध्यभाग में मुकर्रबखान का डेरा था। उसके शामियाने के चारों ओर मशालें फुरफुरा रही थीं। हाथों में नंगी तलवारें लिये सिपाही पहरा दे रहे थे। मशालों के प्रकाश में तलवारें चमचमा रही थीं। अपने डेरे पर मुकर्रबखान मखमली मसनद से टिका आराम कर रहा था। उसके चेहरे पर चिन्ता की रेखाएँ साफ-साफ झलक रही थीं। वह बार बार दाईं ओर बनी कनात की खिड़की की ओर देख रहा था। सामने की काली पहाड़ी पर स्थित पन्हालगढ़ उस अँधेरे में जैसे उसे मुँह चिढ़ा रहा हो। इसी समय बाहर कुछ दूरी पर कुत्ते जोर-जोर से भूँकने लगे। बीस पच्चीस घुड़सवारों का एक दल, अपने घोड़ों को हवा की गति से दौड़ाता हुआ छावनी की ओर आ रहा था। इस दल के बीच में मुकर्रबखान का एक पुत्र और एक दीवान था। उन दोनों के पीछे कुछ मराठा सैनिकों के घोड़े दौड़ रहे थे। तेजी से आ रहा दल प्रवेश द्वार पर रुक गया। शहजादे के पीछे एक पैंतालीस वर्ष का मराठा सरदार घोड़े से उतरा। उसके शरीर पर जख्मों के निशान थे और चेहरा सूजा हुआ था। कुछ दिन पहले ही उसकी एक आँख में चोट आयी थी इसलिए वह आँख लाल थी। दल के सभी लोग खान का झुककर अभिवादन करते हुए उसके सामने गये। उस विकृत चेहरे वाले मराठा सरदार ने शान से ऐंठकर बैठे हुए मुकर्रबखान को देखा। उसे देखकर वह इतना आनन्दित हो गया मानो उसे अपने कुलदेवता का सम्भाजी :: 605