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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 608, कुल 793 में से

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दर्शन हो गया हो। वह मराठा सरदार रोते हुए मुकर्रबखान के चरणों में गिर पड़ा। वह अपनी आँख और नाक खान के पैरों में रगड़-रगड़कर हिचकियाँ लेते हुए बोला, "बचाओऽऽ, खानसाहब बचाओऽऽ।" मराठा सरदार के इस अप्रत्याशित व्यवहार से मुकर्रबखान कुछ हड़बड़ा गया। उसने सलीम से पूछा, "कौन है यह पागल आदमी?" "बाबाजान! यही है वह गणोजी राजे शिर्के। सम्भाजी का सगा साला, शिवाजी का जमाई।" "उठिए गणोजी राजे।" कहते हुए मुकर्रबखान ने बड़े प्रेम से उसकी पीठ पर एक थपकी दी और पूछा, "गणोजी बादशाह की छावनी में तुम्हारी इतनी इज्जत है तो फिर तुम एक बेसहारा दासी की तरह यहाँ रो क्यों रहे हो?" "क्या करें खानसाहब उस सम्भा और कलुशा ने हमारे शिर्के परिवार को बेघर कर दिया है। सारे शिर्के लोगों को खदेड़ दिया है। हमारी कुटरे गाँव की हवेली पर क़ब्ज़ा कर लिया है। हमारे दो-तीन चचेरे भाइयों को मार डाला है। मैं खुद और मेरे साथ देवजी और दौलतराव जैसे लोग भागकर मुगलों की शरण में आये हैं। क्या कहें! क्या बताएँ खान साहब ! अब हमारे बीवी बच्चे भी शिरकान में नहीं रहते।" "लेकिन भोसले तो तुम्हारे निकट सम्बन्धी हैं न?" "ऐसे सम्बन्धी नष्ट हो जायँ तो ही अच्छा। सम्भाजी और उसके उस मूर्ख मान्त्रिक ने शिरकान में हड़कम्प मचा रखा है। हमारे खेत-खलिहान लूट लिये, खड़ी फसल जलाकर खाक कर दी, हमारे पहरेदारों को गड्ढे में पुआल डालकर जिन्दा जला दिया।" गणोजी की ओर दयापूर्वक देखते हुए मुकर्रबखान हँसा और बड़े उत्साह से बोला, "अजी राजा साहब! इस तरह रोने-धोने की जगह तुम सम्भाजी पर सीधे तलवार क्यों नहीं उठाते?" "खान साहब ! पूरी तैयारी कर ली थी। सम्भा ने पहले कलुशा को हमारे ऊपर चढ़ाई करने को भेजा था। उस समय मैंने अनेक सरदारों को और दक्षिण कोंकण के सभी इज्जतदार जागीरदारों को इकट्ठा कर लिया था। अच्छी खासी दस हजार की सेना बना ली थी। उस समय हमने कलुशा को दूर भगा दिया था।" "फिर?" "फिर क्या? उस मूर्ख कलुशा ने रायगढ़ से सम्भा को बुला लिया। उन दोनों के पास सिर्फ पाँच हजार सेना थी।" "तुम्हारी संख्या तो दुगुनी थी न?" "उसका क्या फायदा, खानसाहब?" कौन जाने इस भोसले की औलाद ने 606 :: सम्भाजी