छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकरके जंजीरा बुलन्द परकोटा ध्वस्त कर देते। किन्तु उसी समय महाराष्ट्र में मुगल सेना बाढ़ के पानी की तरह गरजती हुई पहुँच गयी। नतीजा यह हुआ कि हाथ में आयी सफलता से मुँह मोड़कर दूसरी ओर दौड़ना पड़ा। हमारे साथ अन्तिम क्षण में ऐसा क्यों घटित होता है? सफलता के मुट्ठी में आने पर भी हम खाली हाथ क्यों रह जाते हैं?" बात करते-करते शम्भुराजा की दृष्टि बुर्ज के कार्य की ओर जाती थी। उनकी दृष्टि के उस ओर जाते ही मजदूर, राजगीर, सिपाही सभी हड़बड़ा जाते थे। इसी समय कृष्णाजी कोंडा ने महाराज का अभिवादन करते हुए कहा, "महाराज! आज रात तक कार्य समाप्त करने की जिम्मेदारी हमारी है। किन्तु आपके यहाँ पर धरना देकर बैठे रहने से काम करने वाले नाहक ही बार-बार हड़बड़ाते रहते हैं। कल प्रातः संगमेश्वर की ओर आपके कूच करने के पहले वह कार्य पूरा हो जाएगा।" कविराज और शम्भुराजा ने हँसते हुए एक-दूसरे की ओर देखा। दोनों कनात की छाया से बाहर निकले। राजा ने कहा, "कविराज! यहाँ आने के बाद से मन में एक बेचैनी है, पावन घाटी को एक बार देखने की बड़ी इच्छा हो रही है।" "अवश्य राजन् !" वे तत्काल मुढा दरवाजे से दाहिनी ओर गंजी के पठार की तरफ बढ़ गये। वहाँ से दो परिचित चेहरे गढ़ पर चढ़कर आते हुए दिखाई पड़े। उनके आगे-पीछे उनके नौकर-चाकर दौड़ रहे थे। राजा के कदम ठिठक गये। उन्होंने पुनः ढलान पर चढ़ते मेहमानों को घूर कर देखा। उन्होंने देखा कि अर्जोजी और गिरजोजी यादव आ रहे हैं। दोनों यादव बन्धुओं ने पाचाड़ के राजमन्दिर और स्वराज्य के अनेक निर्माण कार्य पूरे किये थे। इसलिए उनके प्रति राजपरिवार में बड़ी आत्मीयता थी। उन लोगों को अचानक आया देखकर शम्भुराजा ने मुस्कराकर पूछा, "यादवजी आप लोगों को कैसे पता चला कि यहाँ पर बुर्ज का निर्माण कार्य चल रहा है?" "महाराज आपके सभी कार्य पूरी निष्ठा और प्रयत्न के साथ पूरे किये हैं, किन्तु हमारा एक काम आपके पास वर्षों से अटका पड़ा है।" "कहिएऽऽ?" "पूजनीय बड़े महाराज के समय यह तय हो गया था कि कगड़ और औंध की जागीरदारी हमारे नाम कर दी जाएगी। किन्तु दुर्भाग्य से महाराज स्वर्गवासी हो गये और कागजात तैयार नहीं हो पाए।" अर्जोजी यादव ने निवेदन किया। "तो यादव ! इसमें ऐसी जल्दी की क्या बात है?" "क्षमा करें! ऐसी कोई भी बात नहीं है, सरकार ! गलती आपकी नहीं है, हमारी किस्मत ही खराब है। जब-जब हमारे काम का अवसर आता है तब कुछ न सम्भाजी :: 619