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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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परामर्श के लिए एकत्र बुजुर्गों की ओर आदरपूर्वक देखते हुए शम्भूराजा ने कहा, "आप जैसे बुजुर्गों के आशीर्वाद और पिताजी के पुण्य के बल पर ही हम पिछले आठ वर्षों से औरंगजेब जैसे शक्तिशाली शत्रु का सामना कर रहे हैं। कभी सिर पर बर्फ का ठंडा गोला रखकर टक्कर दी तो कई बार दुश्मन की लाखों की सेना को विनष्ट करने के लिए हवा के घोड़े पर सवार हुए। बुरहानपुर बागलाण से कारवार-गोवा तक और नीचे कर्नाटक-जिंजी तक भाग दौड़ करते हुए अनेक बार मुठभेड़ हुई। कई बार तो दुर्दैव से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई कि जैसे पानी का भयंकर सैलाब आकर दम घोंट रहा हो। किन्तु मामा हंबीरराव, कोंडाजी, मानाजी, रूपाजी जैसे बहादुर साथियों और आपलोगों के बलबूते हम अनेक बार मुगल सेना को मात देने में सफल हुए हैं।" सेनापति म्हालोजी घोडपड़े ने कहा, "महाराज आपकी बहादुरी और दृढ़ निश्चयी संकल्पशक्ति की कोई तुलना ही नहीं है।" "सच है घोडपड़े काका! इतनी बड़ी सेना जो इस भूभाग में आती है, इतने वर्ष जूझती रहती है। उसका मुकाबला करने के लिए ये पगड़ी और फटे कम्बल वाले लोग दृढ़ निश्चय के साथ खड़े हो जाते हैं। गोला बारूद न होने पर हाथ में चट्टानों के पत्थर ले लेते हैं, दर्रे घाटियों में साहसपूर्वक शत्रु का सामना करते हैं। इस प्रकार के कटु और सुदीर्घ जुझारूपन के उदाहरण विश्व के इतिहास में कम ही होंगे।" बोलते-बोलते शम्भू महाराज थक गये। उन्होंने एक लम्बी साँस ली और फिर निश्चिन्त स्वर में बोले, "किन्तु अब दिन बहुत बदल गये हैं। इतनी लड़ाइयाँ लड़ने पर भी हमारे हिस्से में थोड़ा भी यश नहीं आया। निराशा के गर्त में गोता लगाता बादशाह अब पूरी तरह से पागल हो गया है। अगले कुछ ही दिनों में वह सीधा दौड़कर हमारे ऊपर आ गिरेगा। चाहे अगले दरवाजे से आये या पिछले दरवाजे से, किन्तु पिंजरे में बन्द बिलाव की तरह वह बिना झपट्टा मारे नहीं रहेगा।" "सच है महाराज।" म्हालोजी घोडपड़े ने कहा। "इसी बीच पूरे तीन वर्षों से महाराष्ट्र भयंकर अकाल से पीड़ित है। पानी और चारे के अभाव में जनता और पशु दोनों बेहाल हो गये हैं। पिछले तीन वर्षों में सेना में नयी भर्ती भी नहीं हुई है। अनेक अच्छे घोड़ों के अस्तबल ध्वस्त होने की स्थिति में आ गये हैं। घरों के भीतर कलह है तो दरवाजे के बाहर अकाल की तपती धूप। पानी के अभाव में धरती में दरारें पड़ गयी हैं और आकाश भी मानो कुपित हो गया है। किन्तु दोस्तो! हमारे पास दो ऐसे अग्नि अस्त्र हैं कि उनसे हम बादशाह का नशा बड़ी सहजता से उतार सकते हैं।" शम्भूराजा की बातें सुनकर युवा धनाजी, सन्ताजी, खंडो बल्लाल आदि का 636 :: सम्भाजी