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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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समय युवा पुत्र को समझाना भी आवश्यक था। इसलिए उन्होंने कहा, "शम्भू आपको यहाँ पीछे छोड़ जाने में भी मेरा एक उद्देश्य है। हम सुदूर देश में अधिक समय तक अटके रहे तो राज्य की रक्षा के लिए तो यहाँ किसी जिम्मेदार व्यक्ति को रहना नहीं चाहिए क्या?" "रक्षा की पूरी तैयारी और सेना रायगढ़ पर है। सारा कार्य व्यापार और सारी सम्पदा वहाँ पर है। यहाँ शृंगारपुर में रहकर हम किसकी और कितनी रक्षा करेंगे, पिताजी?" कुछ छुपाने के प्रयत्न में जैसे भेद और भी खुल जाय, ऐसी स्थिति शिवाजी महाराज की हो गयी। उन्होंने ममता से शम्भूराजा का हाथ कसकर पकड़ लिया। कुछ देर में ही उनका दम घुटने लगा। पीड़ा से कराहती-सी आवाज में बोले, "बस! शम्भू बेटे, हम इतना ही कह सकते हैं कि आपके लिए आज रायगढ़ सुरक्षित नहीं है। दुर्भाग्य से आज हम तुम्हें रायगढ़ भी नहीं दे सकते। साथ ही हमें अपने होनहार और प्राणों से प्रिय शम्भू को खोना भी नहीं है।" सेना शास्त्री नदी के पार जा रही थी। शिवाजी महाराज संगमेश्वर के आसपास जमकर बैठी पहाड़ी की कतारों, घने जंगल और नदी पार के नावड़ी बन्दरगाह के पास की खाड़ी को ध्यान से देख रहे थे। यहाँ का जंगल सघन दिखाई पड़ रहा था। घने जंगल की ओर देखते हुए महाराज बोले, "शम्भू बेटे, इसके बाद कुछ महीनों के लिए आपको शान्ति मिलेगी। अपने काव्य प्रेम के साथ विद्याभ्यास भी कर लें। साथ ही यहाँ की मिट्टी के अनेक रंगों को परखकर देखें। जिस प्रदेश पर आपको कल शासन करना है वहाँ के लोगों को परखना पढ़ना सीखें। ध्यान रखें कि हमारे मराठा लोगों में कुछ ऐसी नीच प्रवृत्ति के लोग हैं कि अपने छोटे से स्वार्थ के लिए अपने राज्य और राजा को डुबो देने में जरा भी आगा पीछा नहीं देखेंगे।" 62 . सम्भाजी