भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 65, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 65

श्रृंगारपुर में एक श्रृंगारपुर के पीछे की ओर सह्याद्रि की श्रेणियों की लम्बी कतार और ऊबड़ खाबड़ पहाड़ थे। बहुत ही दुर्गम प्रदेश, यहाँ दिन में अन्धकार बना रहता था, देखने में डरावना लगता था। यहीं से तिवरा घाट और भालेघाट के बहुत ही कठिन रास्ते सह्याद्रि की चोटी पर पहुँचते थे। कोंकण बन्दरगाह का माल यहाँ से बैलों की पीठ पर लादकर पहुँचाया जाता था। यहाँ का जंगल इतना घना था कि बाघ को भी यहाँ से गुजरने में पसीना आ जाय। इसीलिए बैलों को खाने के साथ में घास लेकर जाते थे। उनके साथ पचास-साठ लोग नंगी तलवारें और भाले लेकर चलते थे। और किसी काम के लिए इस रास्ते से कोई आता-जाता नहीं था। श्रृंगारपुर में लगभग पन्द्रह बीस हजार लोग रहते थे। इस बस्ती में सरदारों और सम्मानित लोगों के साठ बड़े बड़े मकान थे ! बस्ती के बीचोबीच एक बड़ा झरना था। झरने के किनारे सूर्यराव सुर्वे का बहुत बड़ा मकान था। सुर्वे के बाद उनके दामाद शिर्के इस घर में आये। यहीं थी शम्भूराजा की ससुराल। इस घर के समीप ही शिवाजी महाराज ने एक बड़ा राजमहल बनवाया था। उसी में शम्भूराजा, येसूबाई और दुर्गादेवी रहते थे। बस्ती के मध्य में दो बड़े बगीचे, समकोण पर बने रास्ते और फौवारे थे। बगीचे की दूसरी ओर सुल्तान हवेली थी। उसमें युवराज के मित्र कवि कलश रहते थे। श्रृंगारपुर में शाक्त पन्थियों का शक्तिपीठ बन गया था। तन्त्र मन्त्र का ज्ञान रखने वाले बहुत से ब्राह्मण श्रृंगारपुर क्षेत्र में रहते थे। सह्याद्रि पर्वत की भव्य चोटियों पर शिवाजी महाराज ने अभी हाल ही में प्रतिचगढ़ नामक किले का निर्माण किया था। उस किले की चोटी पर भी बहुत से ब्रह्मर्षियों ने अपने मठ बना लिए थे। चारों ओर की गुफाएँ भी भर गयी थीं। येसूबाई भी अपने अपमान और उपेक्षाभाव से भीतर भीतर जल रही थीं। वे सम्भाजी . 63