छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअब तो समझ में आया कि उस सम्भा को पकड़ने से हमारे भाई-बन्धु मेरे साथ कैसा व्यवहार करेंगे? सुबह होने से पहले ही ऐसी आशंका मेरे मन में आयी। मैंने नागोजी को तत्काल जगाया और दूसरे तम्बू में जाकर सो गया। नागो बाबा उठने को तैयार न थे। देखिए क्या से क्या हो गया।" गणोजी की बातें सुनकर मुकर्रब ने हँसकर कहा, "चिन्ता मत कीजिए गणोजी, बादशाह आपको जागीर और जवाहरात देकर मालामाल कर देंगे।" "आगे का आप देखो, खानसाहब! हमारी जिम्मेदारी अब समाप्त हुई।" नागोजी माने ने कहा। नागोजी ने आगे कहा, "रात की घटना तो एक छोटी झंझट थी। हमें जागीर मिले या न मिले पर आप सम्भाजी नाम की इस बला को जल्दी ही यहाँ से ले जाइये, नहीं तो लोग हमारा नामोनिशान तक मिटा देंगे।" "इन विद्रोही लड़कों का क्या करें?" थानेदार मुकर्रब से पूछने लगा। मुकर्रब को एक क्षण को मालेघाट की वह जानलेवा चढ़ाई याद आयी। गणोजी का उपकार उसके ऊपर पहाड़ के समान था। किन्तु उन जंगल घाटियों में इन बहादुर लड़कों जैसे रहबर न मिले होते तो मुगल सेना को आज यह दिन देखने को न मिलता। औरंगजेब को मोहरा चाहिए था वह तो मुकर्रब को मिल ही गया था। उसे पाने में इन लड़कों का भी गिलहरी का हिस्सा था। कृतज्ञता के इस भाव से उसने थानेदार से कहा, "छोड़ दो, जंगल के पंछी हैं जंगल की ओर ही जाएँगे।" कैद हुए लड़के मुक्त हो गये। पैर घसीटते हुए वे जंगल की ओर आधा कोस ही गये होंगे कि उनके पैर अटकने लगे। उनके हृदय में चटकती प्रतिशोध की आग उन्हें चैन नहीं लेने दे रही थी। शम्भूराजा को जंगली पशु की तरह बाँधकर खींचते हुए ले जाने वाला असली व्यक्ति मुकर्रबखान है। मुकर्रब की कल की गति, उसका वह आवेश जैसी बातों को लड़के भूले न थे। दबी आवाज में पीर्या बोला, "भाइयो! इस खान ने हमें तो छोड़ दिया किन्तु हमारे शम्भू महाराज को नहीं।" पीर्या के शब्दों को सुनते ही सभी के पैर ठिठक गये। उनके शरीर का खून गर्म होने लगा। अपने पास कोई हथियार न होने पर भी वे झट से पीछे मुड़े। ऐसा लगा जैसे उनका शरीर ही माला बन गया हो। उनमें से किसी ने नारा लगाया, 'जय मल्हारऽऽ' और दूसरे ही क्षण वे आठों मानवी भाले, मुकर्रब और गणोजी का गला घोंटने के लिए हवा की गति से भागने लगे। उन दोनों का गला दबाने के लिए दोनों के हाथ सुरसुराने लगे। उनके शरीर को प्रतिशोध के पंख लग गये थे। गरुड़ की भाँति ये जंगली पंछी खान की ओर दौड़े। मुकर्रब के चारों ओर सिपाहियों का कड़ा पहरा लगा हुआ था। उसका अनुमान इन लड़कों को नहीं था। 678 :: सम्भाजी