छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउसमें दुष्ट रावण सीता का अपहरण कर रहा है बेचारा राम कितना दुखी दिखाई दे रहा था? चलता है बालिके, वियोग-विरह जैसे शब्दों का भी बड़ा गहरा अर्थ होता है। परन्तु देखो मुझे एक शंका होती है। हाँ शम्भूदादा देखिए बेचारी सीता माई अकेली अपनी कुटी में बैठी है और बाहर ही बाहर कोई राम को ही भगाकर ले जाये तो? पागल कहीं की। राम को भगाकर ले जाये तो? ऐसा उल्टा रामायण रचने का साहस? ऐसा साहस किसी में होगा क्या? रास्ते में अनेक गढ़ियाँ थीं। गाँव-गाँव के जमींदार कोई कोई देशमुख तो कोई देशपाण्डे थे। भयभीत प्रजाजन इन लोगों की ओर भाग रहे थे। उनके दरवाजों पर अपनी व्यथा व्यक्त कर रहे थे, "जमींदार साहब! धोखा हो गया है। कुछ कीजिए, हमारे शम्भूराजा को बचाइये।" जागीरदार और जमींदार बड़ी उलझन में पड़े थे। परन्तु अन्दर से उन्हें प्रसन्नता थी। उनके चेहरे पर भय था। वे सोच रहे थे—क्या सचमुच शम्भूराजा कैद हो गया? वे घर के भीतर जाकर खुशी से शराब का घूँट लेते थे। पिछले कुछ वर्षों में जबसे स्वराज्य आया जागीरदारी और गढ़ियों का वैभव समाप्त हो गया था। अब ऐसा नहीं था कि वे जो कुछ करें वही कानून हो। अन्यायी जागीरदारों के लिए हिन्दवी स्वराज्य एक संकट था। इसीलिए शम्भूराजा के कैद हो जाने के समाचार से उन्हें गुदगुदी होने लगी। वे ऊपरी तौर पर प्रजा को सान्त्वना देने का प्रयास कर रहे थे "भाइयो! इतनी गड़बड़ मत करो। राजा को कुछ नहीं होगा। हम किस दिन के लिए हैं?" "परन्तु सरकार! खान की सेना पुसेसावली के मैदान तक पहुँच चुकी है। राजा और कविराज को बीच में ले रखा है। चारों ओर से पचीस हजार की फौज है।" "कितनी फौज बताई?" "पचीस हजार।" "सुना आप लोगों ने इतनी बड़ी फौज शत्रु के पास है। तो यहाँ इकट्ठे हुए पचास-साठ हट्टे कट्टे लोगों से क्या होगा?" "हम जलकर राख हो जाएँगे। हम हर तरह का खतरा उठाएँगे परन्तु अपने शम्भूराजा को छुड़ाकर ले आएँगे।" सम्भाजी :: 691