छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबार समाप्त हो गया था। खुदा ने मेहरबानी की थी। प्रसन्नता से सभी की नींद उड़ गयी थी। किन्तु बादशाह को अपनी छाया से भी भय लगता था। अनेक बार वह चिन्तित हो जाता था, अपनी चौकन्नी नजरों से इधर उधर देखते हुए डेरे से बाहर आ जाता था। भीमा नदी के विशाल तट के आसपास किसी बड़े पहाड़ या गहरी खाई जैसी छिपने की जगह नहीं थी। इसलिए टिड्डी दल की तरह अचानक मराठा फौज के टूट पड़ने की कोई सम्भावना नहीं थी। किन्तु मुकर्रबखान कोई भेड़ बकरी लेकर बादशाह के पास नहीं आ रहा था। वह बागी शिवाजी के पुत्र को बाँधकर खींचता हुआ बादशाह के पास ले आ रहा था। थोड़ी-सी असावधानी से भी रंग में भंग हो सकता था। इसका बादशाह को पूरा ज्ञान था। बादशाह वजीरे-आजम असदखान से बार-बार पूछता था, “शेख मुकर्रब के साथ कितनी फौज है?” असदखान का जवाब होता, “पचीम हजार।” अपने विश्वसनीय गुप्तचरों से बादशाह बार बार इस संख्या की पुष्टि करता। अपनी फौजी शक्ति के प्रति आश्वस्त होने पर भी बादशाह का डर कायम था। सम्भाजी की गिरफ्तारी के समाचार ने बादशाह के सैनिकों और मरदागों को खुशी से पागल कर दिया था। यह सोचकर कि दक्खिन का दशावतार समाप्त हुआ, लोग प्रसन्न हो रहे थे। उन्हें लगता था कि शीघ्र ही दक्खिन से उत्तर जाने का अवसर मिलेगा। समीपी रिश्तेदार और सरदार बादशाह की खुशी में सम्मिलित होने के लिए बहादुरगढ़ की ओर दौड़ पड़े थे। बादशाह ने एक सुबह असदखान को हुक्म दिया, “वजीरे आजम! यहाँ चंभारगोंदा, अकलूज, पंढरपुर, दौंड आदि इलाकों में शीघ्रता से एक फरमान जारी कीजिए।” “जी मेरे आका!” “सभी काफिरों को सूचित कर दीजिए कि किसी की घुड़साल में, किसी के दरवाजे पर, या रास्ते पर एक भी घोड़ा दिखाई नहीं पड़ना चाहिए।” “लेकिन-लेकिन जहाँपनाह ऐसा कैसे हो सकता है? वे अपने जानवरों को भेजेंगे कहाँ?” “कुछ दिनों के लिए उन्हें अपनी घुड़साल खाली करनी पड़ेगी। अपने अपने जानवर चाहे हट्टे-कट्टे हों या दुबले, उन्हें बाजार में या रिश्तेदारों के घर भेजना होगा। परन्तु यदि कोई मराठा बच्चा, दिन में या रात में घोड़े पर सवार दिखाई देगा तो उसके हाथ या पैर तोड़ दिये जाएँगे।” हुक्म की तामील जल्दी ही की गयी। रात मे ही आस-पास के सभी घोड़े गायब हो गये। सबेरे एक बार मसनद के साथ बैठ जाने पर दोपहर तक तम्बू में बने सम्भाजी :: 697