भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 710, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 710

भीमातट की करुण कथा एक शीर्ष भाग पर चाँद तारों की मीनार से सुशोभित सज धज शानदार दिखने वाले महल के सामने से जुलूस आगे निकल रहा था। उस महल के भीतर तीन प्राणियों को कैद किया गया था। ढोल, तासों और तुरुहियों की आवाज इन तीनों बन्दियों के कानों में पड़ रही थी। तीनों व्याकुल हो गये। यदि उनके धक्के से सामने की दीवार टूट सकती तो उन्होंने यह प्रयास भी किया होता। उन्हें सूचना मिल गयी थी कि सम्भाजी को कैद कर लिया गया। उनकी मुश्कें बाँधकर उन्हें बहादुरगढ़ लाया जा रहा है। उस दुखद समाचार से तीनों निरन्तर विलाप कर रही थीं। बादशाह के हुक्म के अनुसार इखलासखान और हमीदुद्दीनखान सम्भाजी राजा और कविराज को दीवाने खास की ओर जुलूम के साथ ले जा रहे थे। बादशाह के दरबार में मक्का मदीना जैसे उत्सव का वातावरण बन गया था। दरबार में सभी अमीर उमराव, शहजादे, पोते, रिश्तेदार आदि उपस्थित थे। इसी समय मुकर्रबखान, इखलासखान और बहादुरखान बादशाह के सामने प्रस्तुत हुए। उन्होंने झुककर बादशाह को सलाम किया। बादशाह ने पिता पुत्र को अनेक मूल्यवान उपहार देकर मालामाल कर दिया। वे दोनों झुके झुके ही बगल में सरक गये। बादशाह ने सामने की ओर नजर उठाई। जंजीरों से पूरी तरह जकड़े हुए सम्भाजी राजा और कवि कलश खड़े थे। इस दृश्य को देखकर बादशाह बहुत प्रसन्न हो गया। उसकी भावभरी प्रसन्न अवस्था को देखकर दरबार में उपस्थित अनेक लोगों की आँखों में आँसू उमड़ पड़े। बादशाह से रहा नहीं गया। वह अत्यधिक भाव विभोर हो अपने रत्नजड़ित सिंहासन से उठकर खड़ा हो गया। कौड़ियों की माला सीने से चिपकाए सिंहासन की सीढ़ियाँ उतरकर नीचे आया। पूरा दरबार उसकी ओर उत्सुकता से देखने लगा। बादशाह ने जमीन पर अपना माथा टेका। अल्लाहताला का एक धुँधला बिम्ब उसकी 708 . सम्भाजी