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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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महाराज ने ही प्रस्तुत किया। तुम्हारे पिता और तुम्हारे भाई-शिवाजी और सम्भाजी समय को अतिक्रान्त करके हजारों योजन आगे जाने वाले महापुरुष ही थे। हम जैसे जमींदारों और जागीरदारों तथा शिवाजी सम्भाजी के बीच यही अन्तर है। आज जो घटना घटी है, जो हादसा हुआ है उससे हम बहुत शर्मिन्दा हैं। तीन बहुत देर रात में जुल्फिकारखान सैनिक की वर्दी पहने बादशाह के सामने उपस्थित हुआ। वह कहने लगा, "जहाँपनाह ! शाम के समय से ही मेरी फौजी टुकड़ियाँ बहादुरगढ़ से बाहर जाने लगी हैं। हुक्म की तामील हो गयी है।" "कुल मिलाकर कितनी फौज होगी? "मैं अपने साथ यहाँ से बीस हजार ले जाता हूँ। इसके अतिरिक्त पूना और चाकण में तैयार हैं। वहाँ से बीस हजार लेता हूँ और सीधे जाकर रायगढ़ को टक्कर देता हूँ।" "शाब्बास!" जीत का आनन्द औरंगजेब के चेहरे पर छुप नहीं पा रहा था। वह प्रसन्नता से बोला, "बेटे जुल्फी अब तो वैसे करना भी क्या है? सम्भा की गिरफ्तारी सुनकर मरगट्ठे अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भाग गये होंगे। तुम्हें बस इतना ही करना है-" "हुक्म, जहाँपनाह!" "आजतक हमें भूत की तरह चिढ़ाने वाली सह्याद्रि की पहाड़ी पर थूकना होगा और वहाँ के एक एक प्रदेश को जीतने की शुरुआत करनी होगी।" जुलूस के बाद दूसरे दिन नाश्ते का समय बीत गया फिर भी सूर्य बादलों के पर्दे से बाहर निकलने को तैयार न था। वजीर असदखान, औरंगजेब के सभी शहजादे, सभी जनानियाँ आदि सभी की एक ही चिन्ता थी कि आगे क्या होगा? बादशाह सम्भाजी के बारे में क्या निर्णय लेगा, इसका अनुमान वजीरे आज़म असदखान भी नहीं लगा सकता था। उस दिन जब असदखान सजधजकर अपने डेरे से बाहर निकलने लगा तो उसकी एक बेगम ने पूछा, "अजी, उस काफिर के बच्चे का क्या होगा?" "जो कुछ भी होगा, आज ही होगा।" असदखान ने उत्तर दिया, "घात- अपघात कुछ भी हो जाये किन्तु जब तक अपना दुश्मन समाप्त नहीं हो जाता तब 712 :: सम्भाजी