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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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देवी की मूर्ति वहाँ विद्यमान थीं। महादजी रात को कुछ देर से घर लौटे। उन्होंने मन्दिर के सामने, संगमरमर के नंगे फर्श पर अपनी पत्नी को निढाल होकर पड़े देखा। शरीर पर एक भी आभूषण नहीं, शोक की व्याकुलता में बाल बिखरे हुए थे। महादजी के बाहर आने की आहट पाते ही वे घायल सिंहिनी की तरह झट से उठीं। उनकी आँखें क्रोध से अंगार की तरह जल रही थीं। वे गरज पड़ीं, "आइएऽऽ आइएऽऽ आ गये? बहुत बड़ी बहादुरी करके लौटे हैं? आइए मैं अपने बहादुर स्वामी की आरती उतारती हूँ।" महादजी क्रोध और सन्ताप से व्यग्र हुई अपनी पत्नी को मनाने की कोशिश करने लगे। सखुबाई क्रोधावेश में प्रश्नोत्तर करने लगीं। "हमारे छोटे भाई सम्भाजी राजा का ऐसा घोर अपमान हो रहा था। नासमझ छोटे बच्चे भी उन पर गोबर के गोले फेंक रहे थे। यह सब देखकर आपका खून उबला कैसे नहीं?" "परन्तु सखु. . ?" "वह शिवाजी जैसे प्रतापी का पुत्र था। वह जीजामाता जैसी युगस्त्री का पोता था। इस मिट्टी का अंश था। उसको पीड़ित करने वाले शत्रु का प्रत्युत्तर क्यों नहीं दिया आपने?" "सखु उस बादशाह परमेश्वर को कौन प्रत्युत्तर देगा।" सखुबाई का गला भर आया वे रोते हुए बोलीं, "सम्भाजी राजा का जहाज डूब रहा है। उसे छोड़कर सब लोग औरंगजेब से आकर मिलें। इस प्रकार का पत्र आपने सभी जागीरदारों को लिखा था। उस समय क्या मैंने आपसे एक भी शब्द पृछा था?" सखुबाई के एक भी प्रश्न का उत्तर महादजी के पास नहीं था। सखुबाई बिना रुके गरज रही थीं, "अजी, आप एक बार इस बात की उपेक्षा भी कर दें कि वह शिवाजी का बेटा है परन्तु यह कैसे भूल सकते हैं कि उसकी धमनियों में बहने वाला रक्त निंबालकर की बेटी का है। वह निंबालकर का नाती है। मैं पृछती हूँ कि यह आपको क्यों नहीं याद रहा? खून की पुकार पर खून मदद को क्यों नहीं दौड़ा?" सखुबाई के प्रश्नों की बौछार के सामने महादजी हतप्रभ हो गये। वे वहीं मन्दिर में ही बैठ गये। दुख, पीड़ा और पश्चाताप के स्वर में महादजी कहने लगे, "सखु तुम्हारे सीधे प्रश्नों का उत्तर देने में मुझे कोई संकोच नहीं है इस भूमि के अनेक जमींदारों और जागीरदारों ने अरबों-खरबों कमाये। किन्तु इस भूमि पर कोई छत्रपति बन सकता है, राजा बन सकता है इसका उदाहरण तुम्हारे पिता शिवाजी सम्भाजी :: 711

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