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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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चार "सम्भाजी और कलश राजबन्दी नहीं लुटेरे हैं।" बादशाह ने स्पष्ट शब्दों में अपनी यह राय अनेक बार अपने कर्मचारियों और सहयोगियों के सामने दी थी। इसीलिए इन बन्दियों को बहादुरगढ़ के शाही कैदखाने में उन्हें नहीं भेजा गया था। एक किनारे पर खुले मैदान में बाँस और लकड़ी के मजबूत खम्भों से एक मजबूत कैदखाना एकदम नये रूप में बनाया गया था। उसे चारों ओर से लम्बी घास की छाजन से घेरा गया था। उस कैदखाने के चारों ओर पाँच हजार हैवानों की फौज नंगी तलवारें लिये तैनात थी। अन्दर बैठने के लिए कोई फटी पुरानी दरी भी नहीं थी। जिस प्रकार काबू में न आने वाले जंगली भैंसों या पागल हाथियों को बन्द कर दिया जाता है उसी तरह सम्भाजी और कवि कलश को अन्दर फेंक दिया गया था। उनके बिछाने के लिए थोड़ा बहुत धान का पुआल और नंगी मिट्टी ही थी। उन दोनों को कल ऊँट पर इस तरह आड़ा टेढ़ा दौड़ाया गया था कि इस अमानवीय यातना से उनके शरीर पत्थर हो गये थे। उनके शरीर का खून और उनकी चर्बी गीली मिट्टी के गोले की तरह हो गयी थी। उनके हाथ पीठ की ओर जंजीरों द्वारा मजबूती से बँधे थे। पाँवों में जानवरों की तरह बेड़ियाँ डाली गयी थीं। कल ऊँट की नंगी पीठ पर बैठने से उनके पुट्ठों और उनकी जाँघों की चमड़ी रगड़कर छिल गयी थी। किन्तु यह आघात और दुर्भाग्य का जहरीला घाव इतना अकल्पनीय और क्रूर था कि उसके सामने चमड़ी का छिल जाना कुछ भी नहीं था। उन दोनों की लाल आँखें प्रकाश में भयानक, दिल दहला देने वाली और चमकीली दिख रही थीं। उन कैदियों की दयनीय अवस्था देखकर कलेजा फटता था। रूहूल्लाखान का दिल भी दहल गया। वह अनजाने ही बोल पड़ा, "सम्भा बेटा ये तेरी कैसी हालत है? कहाँ गये तुम्हारे तैंतीस करोड़ देवी देवता? कहाँ भाग गये आग के समुद्र में छलाँग लगाने वाले शिवाजी के मर्द मावले ?" सम्भाजी राजा और कविराज दोनों ही चुप थे। वे चेतनाशून्य दिखाई पड़ रहे थे। उनकी आँखें झाड़ियों में फँसे बाघ के बच्चों की तरह लाल लाल दिख रही थीं। वे दोनों रूहूल्लाखान की ओर आक्रोशभरी नजरों से देख रहे थे। रूहूल्लाखान ने आते ही बादशाह का अतिमहत्त्वपूर्ण सन्देश पहुँचा दिया। "सम्भा, बादशाह को तुमसे दो और सिर्फ दो ही चीजें चाहिए। साफ साफ बता दे कि कहाँ रखे हैं तेरे जर जवाहरात और कहाँ हैं तुम्हारी रत्नशाला?" 714 · सम्भाजी