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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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सम्भाजी के होंठ हिले नहीं। इसके विपरीत सम्भाजी राजा और कविराज खान की ओर व्यंगभरी नजरों से देखने लगे। खान को यकीन था कि पहला प्रश्न निरुत्तर रहेगा। इसलिए उसने तरकस से और तेज धार वाला तीर निकाल निशाना लगाने की तरह दूसरा प्रश्न किया, "तुम्हारे करोड़ों मुहरों के खजाने को जानकर बादशाह तुम पर फिदा हो जाएगा।" सम्भाजी राजा चुप थे किन्तु रूहूल्लाखान पीछे हटने को तैयार न था। उसने हठ करते हुए पूछा, "बोल, कौन, कौन हैं वे लोग?" "कैसे लोग?" कविराज ने मुँह खोला। "वही मूर्ख लोग! जो पिछले अनेक सालों से खाते हैं बादशाह का नाम और तुम मराठों के साथ गुप्त सम्बन्ध रखते हैं। बताओ कौन हैं वे बदमाश?" उन दो प्रश्नों के लिए खान ने बौछार लगा दी थी। जैसे भी हो दूसरे प्रश्न का उत्तर तो सम्भाजी को देना ही चाहिए। उत्तर न मिलने से वह बहुत बौखला रहा था। बड़ी दया दिखाकर राजा और कविराज को समझा बुझा रहा था, "सम्भा अभी बहुत जिन्दगी बाकी है। तुम्हारी अभी उम्र ही कितनी है? सिर्फ बत्तीस साल। हमारे बादशाह औरंगजेब की मर्जी से चलोगे तो अभी भी अपनी जिन्दगी बचा सकते हो। मेरी बात सुनो मूर्खों।" काल की चालाक अदृश्य कलाओं ने दोनों के होंठ सिल दिए थे। वे दोनों किसी भी बात का सुराग नहीं लगने दे रहे थे। रूहूल्लाखान परेशान हो गया। वह चिढ़कर जोर से चिल्लाया, "अरे शैतानों याद रखो— बादशाह सलामत ने अपनी जिन्दगी में किसी भी शत्रु पर इतना रहम नहीं दिखाया है। कस्मे वादे तोड़कर, अपने खून के रिश्ते वालों को भी जहन्नुम में भेजने के लिए वे ज्यादा मशहूर हैं। अच्छी तरह से कबूल करो, बोलो तुम्हारा खजाना कहाँ है? तुम्हारे साथ हमारे कौन कौन से गद्दार सरदार हैं?" "ज्यादा से ज्यादा क्या कर सकता है तेरा वह नीच बादशाह?" कविराज ने जोर से पूछा। "पागल मत बनो! इस कैदखाने में भूखे कुत्ते छोड़े जाते हैं वे तुम्हारी चर्बी को काट काटकर खाएँगे।" "मतलब कि बादशाह अन्त में अपनी मदद के लिए अपने भाइयों को बुलाने वाला है।" कलश की इस बात पर सम्भाजी को उस अवस्था में भी हँसी छूट गयी। किन्तु आवश्यकता मनुष्य को अधम बना देती है। इसी वजह से रूहूल्लाखान ये गालियाँ, ये व्यंग सहन कर रहा था। कलश ने उसे अपने पास बुलाया। ऐसा संकेत दिया कि कुछ भेद की बात करनी है। जब रूहूल्लाखान पास आ गया तो कलश ने उसके मुँह पर थूक दिया। इस घोर अपमान से खान बहुत चिढ़ गया। सम्भाजी 715