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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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उसने अपनी कमर पर हाथ रखा। वहाँ से तेज धार वाली कटार निकालकर कविराज की ओर झपटा। किन्तु उसी क्षण उसे बादशाह की याद आ गयी। उसे लगा कि बादशाह सोच सकता है कि इतने महत्त्वपूर्ण राजबन्दी को मैंने अपनी किसी स्वार्थ बुद्धि अथवा किसी दुष्टता से मार डाला। ऐसे शक्की और चालाक मालिक का क्या भरोसा ? उसने अपने पर काबू पा लिया। कटार उसके हाथ से नीचे गिर गयी। धमकियों का डर दिखाने का इन राजबन्दियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था। उसे जो चाहिए था वह भी सम्भव नहीं हो पा रहा था। इसलिए खान बहुत उतावला हो गया था। वह मिन्नत करते हुए बोला, "सम्भा बेटा, तेरी उम्र के मेरे दो बच्चे हैं। उनकी कसम खाकर कहता हूँ। सोने सी जिन्दगी का सर्वनाश क्यों कर रहे हो? फिजूल की इतनी जिद दिखाते हो? "खान साहबऽ तुम्हारे बादशाह पर मुझे बड़ी दया आती है।" सम्भाजी महाराज के मुँह से शब्द बाहर निकले। "क्यूँ?" "कोई पराजित राजा बन्दी बनाया जाता है, तो राजनीति में उसके साथ व्यवहार करने का कुछ ढंग होता है। किन्तु उस व्यवहार का कोई अंश भी तुम्हारे बादशाह में दिखाई नहीं देता। किसी गन्दे कुत्ते को हीरे मोती का हार पहनाकर, उसे मखमली वस्त्र पहनाकर सिंहासन पर बिठाया जाये तो भी वह रहेगा अपने गन्दे पैरों के साथ ही।" "तौबाऽऽ तौबाऽऽ—सम्भा कैसी बातें करते हो? आलमपनाह की बराबरी एक कुत्ते के साथ?" 'हाँ, कुत्ते की भी एक श्रेणी रहती है। तेरे बेवकूफ बादशाह से वह गरीब जानवर कितना नेक और वफादार होता है?" रूहूल्लाखान के पसीने छूट गये। वह पैर पटकते हुए कैदखाने से बाहर निकल गया। वह सोचने लगा, 'सम्भा ने आलमगीर को तोहफे में जो गिन गिनकर उपाधियाँ दी हैं उसे बादशाह से कैसे बताएँ?' रात बहुत हो चुकी थी। ठंडक भी बढ़ गयी थी। दोनों के शरीर के नीचे की मिट्टी और भी कुछ अधिक ही ठंडी हो गयी थी। पहरा देने वाले पाँच हजार सैनिक जाग रहे थे। हवा के तेज झोंके लकड़ी और घास से बने कैदखाने में घुसने की कोशिश कर रहे थे। कैदखाने की छत को ठीक करने के बहाने एक हट्टा कट्टा पहरे पर बैठा सूबेदार आगे आया। उसने जल्दी से घास के गट्ठर भीतर किये। कुछ बाँधने के लिए घास के गट्ठर खोलने का अभिनय किया। उसके साथ काम करने वाले उसके खास आदमी थे। 716 :: सम्भाजी