छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमें चीखे- "इसका मतलब यह है युवराज कि जिन शिवाजी महाराज ने इस महाराष्ट्र का निर्माण किया उनको हमेशा के लिए शान्त करने को निकले हैं आप।" बालाजी पन्त ने जो निष्कर्ष निकाला था उसकी कल्पना मात्र से शम्भूराजा के प्राण सूख गये। ऐसा लगा जैसे किसी ने तेज छुरी उनके कलेजे में उतार दी। आसन से उठकर वे दरी पर बैठ गये और अत्यन्त भयभीत स्वर में बोले, "कितनी भयंकर बात कर रहें है काका आप? "युवराज! कलशाभिषेक फिर दूसरा अभिप्राय क्या है?" बालाजी पन्त दहाड़ें मारकर रोने जैसे स्वर में बोले, "एक राजा के गद्दी पर रहते दूसरा राजा उस गद्दी पर नहीं बैठ सकता। जिसको राजसत्ता प्राप्त करने की उतावली रहती है वही कलश जैसे धूर्त मात्रिकों को एकत्र करता है और तन्त्र-मन्त्र की अघोरी विद्या के बल पर जीवित राजा का नाश करता है। दिवंगत राजा के श्राद्ध के दिन ही नये राजा का सिंहासनाारोहण होता है। इसी के साथ कलशाभिषेक की पूर्णाहुति होती है। शास्त्रज्ञ पंडितों का ऐसा ही मानना है।" शम्भूराजा की आँखों में धारासार आँसू गिरने लगे। उन्होंने बालाजी से तत्काल पूछा, "कलशाभिषेक अनुष्ठान यह भयंकर आशय आपको किसने बताया?" "अजी अब बताना किसको रह गया है। रायगढ़ से लेकर पन्हालगढ़ तक हर जगह यह बात फैल गयी है। आपके इस भयंकर कृत्य का समाचार राज्य के कुछ कर्मचारियों ने महाराज के पास कर्नाटक भी भेजा है। अण्णाजी दत्तो और राहुजी सोमनाथ की शिष्यमंडली, उनके भांजे-भतीजे, स्वयं आपकी सौतेली माता सोयराबाई रानी सभी हर किसी से आपके इस कृत्य का वर्णन करते हैं। बच्चे बूढ़े सभी इस चर्चा में लिप्त हैं। बालाजी आवजी ने कपड़े से अपना चेहरा पोंछा। बालाजी के मुँह से निकले धक्का देने वाले प्रत्येक शब्द को सुनकर युवराज और युवराज्ञी दोनों आश्चर्यचकित रह गये। अपनी आँसुओं और रुलाई के वेग को रोकते हुए शम्भूराजा ने कहा, "जिन नीच और दुष्ट लोगों के विकृत मस्तिष्क से ऐसे विषैले विचार निकलते हैं, कल उनके मुँह में राख भरने में गधे भी पाप कर्म का अनुभव करेंगे। अच्छा हुआ, आपने इतनी दूर आकर हमें सावधान किया।" मरणासन्न, घायल मराठा सरदार की तरह शम्भूराजा नीचे गिर गये। जैसे किसी ने कलेजे पर गरम सरिया रख दिया हो। ऐसी पीड़ा से वे छटपटाये। "बालाजी काका! जिस जीजा माता ने मेरी माँ के मरने के बाद मुझे पाल पोस कर छोटे से बड़ा किया उसी जीजा माता के पुत्र की मृत्यु का सपना संभाजी देखता होगा; ऐसा आप सोच कैसे सकते हैं?" "नहीं-नहीं, एकदम असम्भव।" बालाजी पराजित स्वर में बोले। सम्भाजी · ४९