छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें"जप्ती! मगर किस लिए?" आश्चर्यचकित शम्भूराजा ने कवि कलश की ओर देखा। कविराज भी क्रुद्ध मुद्रा में नजरें झुकाए नीचे की ओर देख रहे थे। शम्भूराजा के मस्तिष्क में बात कौंधी। उन्होंने दाँत पीसते हुए कहा, "मैंने गरीब और मेहनती प्रजा को माफीनामा लिखकर दिया सम्भवतः इसीलिए इन बेचारे पर यह विपत्ति आयी है।" "हाँ! हाँ सरकार।" थानेदार डरते हुए बोला, "मैंने उनको बहुत समझाया, उनसे कहा कि यह निर्णय स्वयं युवराज ने लिया है और किसानों की हालत वास्तव में बहुत खराब है। मगर उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वे बोले बोले " "बताओ, बताओ, कुछ भी छुपाओ नहीं, साफ साफ बोलो।" "उनका कहना है मतलब सैन टुकड़ी के साथ आया हुआ राहुजी सोमनाथ का कार्य व्यापार सँभालने वाला कह रहा था कि शम्भूराजा अभी तो गद्दी पर बैठे नहीं हैं जब बैठेंगे तब कर लेना मुजरा।" "रुक क्यों गये? बोलो बोलो !" "वे कर्मचारी कहते थे कि यहाँ महाराज के जाने के बाद युवराज का हुक्म चलाना था तो महाराज ने कर्नाटक जाते समय रायगढ़ का कार्यभाग शम्भूराजा को न दिया होता? उन्हें कंकड की तरह अलग करके शृंगारपुर के जंगलों में थोडे ही फेका होता?" थानेदार किसी प्रकार घटित घटना का विवरण देकर मुक्त हो गया। शम्भूराजा की मुख मुद्रा वेदनायुक्त और सम्भ्रमित बनी रही। किन्तु येसूबाई और कवि कलश के चेहरे उतर गये थे। युवराज के अपमान से दोनों बहुत क्रुद्ध हो गये थे। शम्भूराजा कुछ अधिक नहीं कह पाये। उन्होंने धीमी किन्तु कठोर आवाज में कवि कलश से कहा, "कविराज साथ में एक हजार सैनिक ले लो और इसी वक्त संगमेश्वर की ओर कूच करो। राहुजी सोमनाथ के कार्यभागी के साथ रायगढ़ के उन हृदयहीन गुंडों को गिरफ्तार करके यहाँ लेकर आओ और शृंगारपुर के कारागार में बन्द कर दो।" उसी दिन सूर्यास्त के पूर्व ही कवि कलश ने अपने मालिक के हुक्म की तामील कर दी। जब कविराज ने शम्भूराजा को आकर अभिवादन किया तो युवराज ने कहा "उन बदमाशों को चार दिन तक भूखे प्यासे रखो। उनको खूब पीटो।" शम्भूराजा की इस कार्यवाही से शृंगारपुर उनकी ख्याति फैल गयी। इससे पहले जावली प्रान्त के सूबेदार स्वयं अण्णाजी दत्तो ही थे। उनके कार्यकाल में वसूली करने वाले कर्मचारियों ने अनेक स्थानों पर अकारण किसानों को सताना आरम्भ कर दिया था। ऐसे लोगों को सबक सिखाने वाला कोई मिला था, इसलिए प्रभावली प्रान्त के परिश्रमी किसान बहुत प्रसन्न थे। ९० सम्भाजी