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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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हैं? जो ससुरजी मेरी जैसी पराये घर की लड़की को इतना प्यार देते हैं वे आप जैसे अपने होनहार पुत्र को कैसे भूल सकते हैं?'' "नहीं येसू, इस शम्भू के लिए अपने पिता के राज्य में न्याय नहीं है। उल्टे यह राज्य के बहुत से लोग उसके चेहरे पर कलंक के काले दाग लगाने का प्रयत्न कर रहे हैं। हमारे शत्रु मुझे एक दुष्ट, मद्यप, उदंड, अहंकारी युवराज सिद्ध करने की होड़ में लगे हैं।" "युवराज भगवान पर भरोसा रखें।" "हम बहुत से देवी-देवताओं की पूजा रोज करते हैं किन्तु सच्चे मन से शिवाजी महाराज नामक देवता के अतिरिक्त संभाजी ने न किसी देवता को अपने हृदय के मन्दिर में बिठाया और न ही पूजा की। उन्हें एक विशाल वटवृक्ष मानकर हम उनकी छाया के लिए व्यग्र हैं। किन्तु कुछ विरोधी शक्तियाँ इस महावृक्ष को मेरी जिन्दगी से दूर ले जाकर, मुझे जड़ से उखाड़ देने का प्रयास कर रही हैं।" कोमल बिछौने पर भी शम्भुराजा को चैन की नींद नहीं आ रही थी। उनका जागना, मछली की तरह तड़पना, गरम और गहरी साँसें लेना आदि येसूबाई निकट से अनुभव कर रही थीं। उन्होंने धीरे से कहा- "युवराज, राज्य के इन अधिकारियों ने भी स्वराज्य का निर्माण करने के लिए अपने जीवन को समर्पित किया है। आप स्वयं उनके साथ बात क्यों नहीं करते? आप स्वयं जाकर अण्णाजी से क्यों नहीं मिलते?'' "क्या करेंगे उनसे मिलकर? उस अभागी हंसा ने आत्महत्या की और उसका सारा दोष मुझ पर लगाया गया। उसी समय वह गोदू आयी, वह अण्णाजी के साढ़ू की लड़की निकली। यहाँ सारी परिस्थिति ने ही ऐसा विचित्र मोड़ लिया है कि समझदारी अँधेरे में अपना मुँह छुपा रही है।" पुरानी पीड़ादायक स्मृतियाँ शम्भुराजा का पीछा नहीं छोड़ रही थीं। युवराज और युवराज्ञी सारी रात जागते रहे। दूसरे दिन शम्भुराजा कुछ विलम्ब से बैठक में गये। कवि कलश पहले से ही उनकी प्रतीक्षा में वहाँ खड़े थे। उनके साथ संगमेश्वर का थानेदार भी खड़ा था। सवेरे-सवेरे देर तक दौड़कर आने के कारण वह पसीने से तर हो रहा था। वह युवराज से मिलने के लिए उपस्थित हुआ था। शम्भुराजा उससे कुछ पूछें उससे पहले वही विनम्र शब्दों में निवेदन करने लगा- "युवराज! सब कुछ गड़बड़-घोटाला हो गया है। कल रायगढ़ से एक सेना की टुकड़ी आयी। सैनिकों ने गरीब किसानों के बर्तन-भाँड़े जब्त कर लिये। दूध देने वाली गायों और भैंसों को भी सरकारी क़ब्ज़े में ले लिया।" सम्भाजी . ४१