छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआरोप लगाया कि राजगद्दी के लोभ में मैं अपने जन्मदाता शिवाजी महाराज जैसे युग प्रर्वतक पिता की जान का दुश्मन बन गया तो मेरे हृदय के टुकड़े टुकड़े हो गये। " " रहने दें युवराज, आप शान्त रहें।" "पिताजी की जान लेने का नीच विचार तो छोड़ ही दें, किन्तु कभी समय आने पर पिताजी के सपनों के लिए, उनके राष्ट्रधर्म के लिए और भगवान के लिए यह संभाजी अपने शरीर के फूल को काल की खाई में चढ़ाये बिना नहीं रहेगा। सात बड़े महाराज की याद आ गयी। याद आते ही शम्भूराजा की आँखों के सामने दुर्गम रायगढ़ आडा तिरछा खड़ा हो गया। वे गहरी साँस लेकर बोले "युवराज्ञी, कितना विचित्र है यह मानव स्वभाव ? समय के साथ लोग किस तरह बदल जाते हैं ? इसी रायगढ़ ने यह दृश्य भी देखा है जब युवराज के साथ खेलते हुए माता सोयराबाई बच्चों से भी बच्चा बन जाती थी। कभी कभी शम्भूराजा के लिए सोयराबाई जीजा माता से भी झगड़ पड़ती थीं। किन्तु ..।" "किन्तु क्या?" • "जब से राजमहल में राजाराम का रोना सुना तब से राजमहल की दीवारों का रंग बदल गया। "युवराज, मुझे तो ससुरजी साहब के राज्याभिषेक का वह भव्य समारोह याद आता है, जब ससुर जी ने आपको हिन्दवी स्वराज्य के युवराज अर्थात् भविष्य के उत्तराधिकारी के रूप में सम्मानित किया था। तब पटरानी के रूप में वहाँ बैठी थीं तब बुवा साहब ने कोई रुकावट पैदा नहीं की थी। "युवराज्ञी, आपने अच्छा स्मरण दिलाया।" वह प्रसंग अपनी आँखों के आगे प्रत्यक्ष करते हुए शम्भूराजा बोले, "आप कहें तो मैं सौगन्धपूर्वक कह सकता हूँ कि राज्याभिषेक के उस समारोह के बाद हमारी इन माताजी ने कभी भी पहले की तरह दिल खोलकर हँसी या बोलीं हों ऐसा मुझे स्मरण नहीं है।" येसूबाई ने युवराज की हथेली पर अपनी कोमल उँगलियों को घुमाते हुए और युवराज को धीरज बँधाते हुए कहा, "आप इस तरह निराश और रुष्ट क्यों होते ४४ सम्भाजी