छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबगावत एक रणुबाई आक्का की पालकियाँ कुछ ही दिन पहले वाई से आकर शृंगारपुर पहुँची थीं। राणुबाई को इस बात की बड़ी प्रसन्नता थी कि उनके छोटे भाई के घर झूला झूलने वाला है। शम्भुराजा को अपनी माँ का प्यार नहीं मिला था। युवराज केवल दो वर्ष के थे तभी उनकी माँ भगवान को प्यारी हो गई थीं। किन्तु संभाजी राजा पर तीनों बहनों की स्नेह छाया थी। बड़ी बहन सकवार बाई उर्फ सखूबाई फलटण के निम्बालकर से ब्याही गयी थीं। बीच वाली राणुबाई वाई के जाधव के यहाँ दी गयी थीं। सबसे छोटी अम्बिकाबाई तारला के हरजी महाडिक से ब्याही गयी थीं। तीनों बहने शम्भुराजा से बड़ी थीं। सबसे छोटी अम्बिकाबाई पर युवराज की असीम ममता थी। किन्तु शम्भुराजा पर सर्वाधिक प्राण निछावर करनेवाली थीं रणुबाई। शम्भुराजा अपने महल में जिस समय पहुँचे, बाहर घना अँधेरा घिर आया था। महल के चौक चिराग जल रहे थे। वे बीच के कमरे में आये। वहाँ पर येसूबाई ने हँसकर उनका स्वागत किया। बगल वाले मन्दिर की ओर संकेत करके वे बोलीं— "युवराज! आज अपने यहाँ कौन मेहमान आये हैं आपने देखा नहीं क्या?" शम्भुराजा ने मन्दिर की ओर देखा। एक स्त्री भगवान के सामने बैठी थी। शम्भुराजा सहजभाव से चार कदम आगे गये। उनकी आहट पाते ही उस स्त्री ने अपना चेहरा ऊपर करके उनकी ओर देखा। उसे देखते ही शम्भुराजा कुछ झेंप गये। गोदू सचमुच बहुत बदल गयी थी। उसके सुन्दर शरीर और पीठ पर लोटती काले घने बालों की नागिन जैसी चोटी में कोई अन्तर नहीं आया था। किन्तु उसका शोख बचपना खो गया था। आँखों के चारों ओर हल्का सा काला रंग चढ़ने लगा था। कोई चिन्ता उसे अन्दर से खाये जा रही थी। युवराज के कुछ कहने के पहले ही गोदू कहने लगी, "महाराज! आपने यहाँ जब से वसूली करने वाले कर्मचारियों को कैद किया है तब से वहाँ किले पर आपके विरुद्ध हर तरह के षड्यन्त्र रचे जा रहे हैं। अधिकारियों ने बहुत ऊधम मचा रखा है।" 92 सम्भाजी