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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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“जाने दो गोदू! ये कलम बहादुर मेग क्या बिगाड़ लेंगे?” “युवराज! अण्णाजी काका की मदद मे राहूजी पन्त और अन्य लोगों ने मिलकर शिवाजी महाराज को एक विशेष सन्देश भेजा है। मरकारी वसूली और राज्य के कार्य व्यापार में बाधा डालने के लिए आपको अपराधी ठहराकर आपको कैद किया जाय। यह भी प्रस्ताव है कि यदि महाराज युवराज को गिरफ्तार करने की आज्ञा नहीं देते तो जब तक महाराज के वापस लौटने तक के लिए उन्हें युवराज पद से हटा देना चाहिए। आपके विरोध में कार्यवाही की जाएगी। युवराज, इम प्रकार के कम से कम तीन प्रम्ताव भेजे गये हैं।” इन सभी घटनाओं पर युवराज ने युवराज्ञी येसूबाई के माथ विचार विमर्श किया। चिन्तित युवराज को धैर्य बँधाती हुई येसूबाई बोलीं- “युवराज, आपके पिताजी की बुद्धिमानी औग हृदय की विशालता का ज्ञान मुझे आपसे भी ज्यादा है। वे राम्ता चलते व्यक्ति को भी न्याय देते हैं तां अपने पुत्र को न्याय मे वंचित करेंगे?” दूमरे दिन युवराज और कवि कलश शास्त्री नदी के पार के गाँवों में गये। वहाँ के किसानों ने आम के नये बगीचे लगाए थे। दोपहरी में युवराज और कवि कलश, परिश्रमी किसानों के माथ घुल मिलकर एक कुएँ के पास बैठे, किसानों के साथ चावल की गेटी, मक्खन औग हरी मिर्च खायीं। शम्भुराजा औग कवि कलश के घोड़े श्रृंगारपुर की ओर लांट रहे थे, तभी युवराज की दृष्टि नदी की सूखी धारा के बीच मे गुजरती शाही पालकी पर पड़ी। पालकी राजमहल की ही थी। येसूबाई के आदेश से कहार गोदू को लेकर मारवट गाँव की ओर जा रहे थे। पालकी को शम्भुराजा ने रोका। अन्दर बैठी गोदू तो क्या नदी की धारा को भी कुछ समझ में नहीं आया। कविराज भी अपना घोड़ा लेकर नदी के पार जाकर रुके। कहार भी थोड़ी दूर जाकर खड़े हो गये। युवराज गोदू की ओर देख रहे थे। व्यावहारिक जगत के कठोर आघात से उसका चेहरा मुरझा गया था। “गोदू तुम्हार पति और ससुर...?” महाराज, वे दोनों मेरे लिए जिन्दा नहीं हैं। उन्होंने जिम दिन स्वराज के विरुद्ध विद्रोह किया, मेरे लिए उसी दिन मर गये।” शम्भुराजा कुछ रुक रुक कर बोले, “गोदू तू एक बार फिर से विवाह क्यों नहीं कर लेती?” “विवाह करूँगी न! किन्तु सिर्फ एक ही व्यक्ति के साथ।” गोदू की आँखें चमक उठीं। गोदू ऐसे बोली थी जैसे स्वप्न में बोल रही हो। “कोई भी हो, किन्तु गोदू समय से विवाह कर ले। तेरे दिल की भाषा तेरे सम्भाजी :: 93