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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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दिलवर की समझ में नहीं आती क्या?" "वह तो भगवान को मालूम होगा।" गोदू धीमे स्वर में बोली, "मेरी समझ में तो इतना ही आता है कि उसकी पत्नी साक्षात् माता लक्ष्मी है। उसे दुखी करने का साहस मैं नहीं कर सकती।" एक ओर तो रायगढ़ में दोषपूर्ण ढंग से शम्भूराजा के विरोध में योजनाबद्ध रूप से अफवाह फैलाई जा रही थी। इससे वे दुखी हो रहे थे। किन्तु दूसरी ओर उनका तन-मन कर्नाटक की लड़ाई की ओर लगा रहता था। प्रतिदिन विजय के समाचार उनके कानों तक आते थे। शिवाजी महाराज के स्वागत में पूरा भागानगर (हैदराबाद) रास्ते पर उतर आया था। गोलकोंडा के कुतुबशाह ने उनका खूब स्वागत किया था। कुतुबशाह के प्रमुख प्रधान की समझ में ही नहीं आ रहा था कि महाराज को कहाँ रखें कहाँ नहीं। सुदूर जिंजी के बुर्ज पर घोड़ों को चढ़ाकर मराठा सैनिकों ने हिन्दुस्तान का दक्षिणी दरवाजा अपने घोड़ों की टाप के नीचे कर लिया था। खुशी की ये खबरें सुनकर युवराज प्रसन्नचित हो जाते थे। गोदू जिस दिन वापस गयी उसी दिन येसूबाई ने शम्भूराजा से कहा, "युवराज का गुस्सा ऐसा है जैसे गरजते गरजते बरस जाने वाली लहर। वह जितने वेग से आती है उसी गति से नष्ट हो जाती है।" "नहीं, नहीं ऐसा कुछ नहीं है।" शम्भूराजा ने उत्तर दिया। ऐसा नहीं है तो रायगढ़ के जिन वसूली कर्मचारियों को आप महीने भर की यातनापूर्ण सजा देने वाले थे, उन्हें दो दिन में ही मुक्त क्यों कर दिया? उल्टे कविकलाश को हुक्म दिया कि उनके भोजन और आने-जाने की व्यवस्था करें।" इस बात पर शम्भूराजा अपनी हँसी रोक नहीं पाये। दो ही दिन में दिलेर खान के जासूस नया सन्देश लेकर, गुप्त रूप से श्रृंगारपुर में दाखिल हुए। कवि कलश ने वह सन्देश पत्र युवराज के सम्मुख प्रस्तुत किया। युवराज ने क्रुद्ध होकर कहा— "क्या पागल हो गया है, वह बुड्ढा खान?" उनकी दृष्टि तेजी से सन्देश पत्र की पंक्तियों पर दौड़ने लगी। "रुस्तम ए दख्खन संभाजी महाराज!" मेहरबानी करो। हमारे पास आ जाओ। पातशाह औरंगजेब गाजी है। उसे सह्याद्रि के साथ पूरा दख्खन देश जीतना है। गुस्ताखी माफ। हमें आपके शाही खानदानी मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं हैं। मगर फिर भी हम आपके दिल का दर्द जानते हैं। आपके पिता की सच्ची मोहब्बत सोयराबाई और राजाराम से है। दरबार के मारे कारकून आपके जैसे स्वाभिमानी मर्द को दुश्मन की निगाह से 94 सम्भाजी