सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-हैरान का अंग 6 सकल शिरोमणि नाम है, तूं है तैसा नांहि। दादू कोई ना लहै, केते आवैं जांहि ॥ 17 ॥ दादू केते कह गये, अंत न आवै ओर । हमहूँ कहते जात हैं, केते कहसी होर ॥ 18 ॥ दादू मैं क्या जानूँ क्या कहूँ, उस बलिये की बात । क्या जानूँ क्यों ही रहै, मो पै लख्या न जात ॥ 19 ॥ दादू केते चल गये, थाके बहुत सुजान। बातों नाम न नीकले, दादू सब हैरान ॥ 20 ॥ ना कहीं दिट्ठा ना सुण्या, ना कोई आखणहार। ना कोई उत्थों थी फिऱ्या, ना उर वार न पार ॥ 21 ॥ परमार्थ स्वरूप नहिं मृतक नहिं जीवता, नहिं आवै नहिं जाइ। नहिं सूता नहिं जागता, नहिं भूखा नहिं खाइ ॥ 22 ॥ न तहाँ चुप ना बोलणां, मैं तैं नांहीं कोइ। दादू आपा पर नहीं, न तहाँ एक न दोइ ॥ 23 ॥ एक कहूँ तो दोइ हैं, दोइ कहूँ तो एक। यों दादू हैरान है, ज्यों है त्यों ही देख ॥ 24 ॥ देख दीवाने ह्वै गए, दादू खरे सयान। वार पार कोई ना लहै, दादू है हैरान ॥ 25 ॥ पतिव्रत निष्काम दादू करणहार जे कुछ किया, सोई हौं कर जाण। जे तूं चतुर सयाना जानराइ, तो याही परमाण ॥ 26 ॥ दादू जिन मोहनि बाजी रची, सो तुम्ह पूछो जाइ। अनेक एक तैं क्यों किये, साहिब कहि समझाइ ॥ 27 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
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