भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-सूक्ष्म जन्म का अंग 11 सब गुण सब ही जीव के, दादू व्यापैं आइ। घट मांहि जामैं मरै, कोइ न जाणै ताहि ॥ 4 ॥ जीव जन्म जाणै नहीं, पलक पलक में होइ। चौरासी लख भोगवै, दादू लखै न कोइ ॥ 5 ॥ अनेक रूप दिन के करै, यहु मन आवै जाइ। आवागमन मन का मिटै, तब दादू रहै समाइ ॥ 6 ॥ निशिवासर यहु मन चलै, सूक्ष्म जीव संहार। दादू मन थिर कीजिये, आतम लेहु उबारि ॥ 7 ॥ कबहुँ पावक कबहुँ पाणी, धर अम्बर गुण बाइ। कबहुँ कुंजर कबहुँ कीड़ी, नर पशुवा ह्वै जाइ ॥ 8 ॥ करणी बिना कथनी शूकर स्वान सियाल सिंह, सर्प रहैं घट मांहि। कुंजर कीड़ी जीव सब, पांडे जाणै नांहि ॥ 9 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य ग्यारहवां सूक्ष्म जन्म का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 11 ॥ साखी 9 ॥

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