भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-माया का अंग 12

यों माया का सुख मन करै, सेजां सुंदरी पास । अंत काल आया गया, दादू होहु उदास ॥ 5 ॥ जे नांही सो देखिये, सूता सपने माँहि । दादू झूठा है गया, जागे तो कुछ नांहि ॥ 6 ॥ यहु सब माया मृग जल, झूठा झिलमिल होइ । दादू चिलका देखि कर, सत कर जाना सोइ ॥ 7 ॥ झूठा झिलमिल मृग जल, पाणी कर लीया । दादू जग प्यासा मरै, पसु प्राणी पीया ॥ 8 ॥ पति पहचान छलावा छल जायगा, सपना बाजी सोइ । दादू देख न भूलिये, यहु निज रूप न होइ ॥ 9 ॥ चितावणी सपने सब कुछ देखिये, जागे तो कुछ नांहि । ऐसा यहु संसार है, समझ देखि मन माँहि ॥ 10 ॥ दादू ज्यों कुछ सपने देखिये, तैसा यहु संसार । ऐसा आपा जानिये, फूल्यो कहा गँवार ॥ 11 ॥ दादू जतन जतन करि राखिये, दिढ़ गहि आतम मूल । दूजा दृष्टि न देखिये, सब ही सैंबल फूल ॥ 12 ॥ दादू नैनहुँ भर नहिं देखिये, सब माया का रूप । तहँ ले नैना राखिये, जहाँ है तत्त्व अनूप ॥ 13 ॥ हस्ती हय बर धन देख कर, फूल्यो अंग न माइ । भेरि दमामा एक दिन, सब ही छाड़े जाइ ॥ 14 ॥ दादू माया बिहड़ै देखतां, काया संग न जाइ । कृत्रिम बिहड़ै बावरे, अजरावर ल्यौ लाइ ॥ 15 ॥

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