भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-माया का अंग 12

विषया का रस मद भया, नर नारी का माँस । माया माते मद पिया, किया जन्म का नाश ॥ 67 ॥ दादू भावै शाक्त भक्त हो, विषय हलाहल खाइ । तहँ जन तेरा राम जी, सपने कदे न जाइ ॥ 68 ॥ दादू खाडा बूजी भगत है, लोहरवाडा माँहि । परगट पैंडाइत बसैं, तहँ संत काहे को जांहि ॥ 69 ॥ साँपणि एक सब जीव को, आगे पीछे खाइ । दादू कहि उपकार कर, कोइ जन ऊबर जाइ ॥ 70 ॥ दादू खाये साँपणी, क्यों कर जीवैं लोग । राम मंत्र जन गारुड़ी, जीवैं इहि संजोग ॥ 71 ॥ दादू माया कारण जग मरै, पीव के कारण कोइ । देखो ज्यों जग परजलै, निमष न न्यारा होइ ॥ 72 ॥ काल कनक अरु कामिनी, परिहर इन का संग । दादू सब जग जल मुवा,ज्यों दीपक ज्योति पतंग ॥ 73 ॥ दादू जहाँ कनक अरु कामनी, तहँ जीव पतंगे जांहि । आग अनंत सूझै नहीं, जल-जल मूये माँहि ॥ 74 ॥ घट माँही माया घणी, बाहर त्यागी होइ । फाटी कंथा पहर कर, चिन्ह करै सब कोइ ॥ 75 ॥ काया राखे बन्ध दे, मन दह दिशि खेले । दादू कनक अरु कामिनी, माया नहीं मेले ॥ 76 ॥ दरसन पहरै मूंड मुंडावै, दुनियां देख त्याग दिखलावै । मन सौं मीठी मुख सौं खारी, माया त्यागी कहैं बजारी ॥ 77 ॥ माया मंदिर मीच का, तामैं पैठा धाइ । अंध भया सूझै नहीं, साध कहैं समझाइ ॥ 78 ॥

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