सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-माया का अंग 12 दादू केते जल मुए, इस जोगी की आग। दादू दूरै बंचिये, जोगी के संग लाग ॥ 79 ॥ ज्यों जल मैणी माछली, तैसा यहु संसार। माया माते जीव सब, दादू मरत न बार ॥ 80 ॥ दादू माया फोड़े नैन दोइ, राम न सूझै काल। साधु पुकारैं मेरू चढ़, देखि अग्नि की झाल ॥ 81 ॥ बिना भुवंगम हम डसे, बिन जल डूबे जाइ। बिन ही पावक ज्यों जले, दादू कुछ न बसाइ ॥ 82 ॥ दादू अमृत रूपी आप है, और सबै विष झाल। राखणहारा राम है, दादू दूजा काल ॥ 83 ॥ बाजी चिहर रचाय कर, रह्या अपरछन होइ। माया पट पड़दा दिया, तातैं लखै न कोइ ॥ 84 ॥ दादू बाहे देखतां, ढिग ही ढोरी लाइ। पीव पीव करते सब गये, आपा दे न दिखाइ ॥ 85 ॥ मैं चाहूँ सो ना मिलै, साहिब का दीदार। दादू बाजी बहुत हैं, नाना रंग अपार ॥ 86 ॥ हम चाहें सो ना मिलै, और बहुतेरा आइ। दादू मन मानै नहीं, केता आवै जाइ ॥ 87 ॥ बाजी मोहे जीव सब, हमको भुरकी बाहि। दादू कैसी कर गया, आपण रह्या छिपाइ ॥ 88 ॥ दादू सांई सत्य है, दूजा भ्रम विकार। नाम निरंजन निर्मला, दूजा घोर अंधार ॥ 89 ॥ दादू सो धन लीजिये, जे तुम सेती होइ। माया बांधे कई मुए, पूरा पड्या न कोइ ॥ 90 ॥
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