भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 171

श्री दादूवाणी-सांच का अंग 13

दादू निवरे नाम बिन, झूठा कथैं गियान । बैठे सिर खाली करें, पंडित वेद पुरान ॥ 94 ॥ दादू केते पुस्तक पढ़ मुये, पंडित वेद पुरान । केते ब्रह्मा कथ गये, नांहिन राम समान ॥ 95 ॥ सब हम देख्या सोध कर, वेद कुरानों माँहि । जहाँ निरंजन पाइये, सो देश दूर, इत नांहि ॥ 96 ॥ पढ पढ थाके पंडिता, किनहूँ न पाया पार । कथ कथ थाके मुनिजना, दादू नाम अधार ॥ 97 ॥ काजी कजा न जानहीं, कागद हाथ कतेब । पढतां पढतां दिन गये, भीतर नांहि भेद ॥ 98 ॥ मसि कागज के आसरे, क्यों छूटै संसार ? राम बिना छूटै नहीं, दादू भ्रम विकार ॥ 99 ॥ कागद काले कर मुए, केते वेद पुराण । एकै अक्षर पीव का, दादू पढै सुजान ॥ 100 ॥ एकै अक्षर प्रेम का, कोई पढेगा एक। दादू पुस्तक प्रेम बिन, केते पढ़ें अनेक ॥ 101 ॥ दादू पाती प्रेम की, बिरला बांचै कोइ । बेद पुरान पुस्तक पढै, प्रेम बिना क्या होइ ॥ 102 ॥ दादू कहतां कहतां दिन गये, सुनतां सुनतां जाइ । दादू ऐसा को नहीं, कहि सुनि राम समाइ ॥ 103 ॥ मध्य निरपक्ष मौन गहैं ते बावरे, बोलैं खरे अयान । सहजैं राते राम सौं, दादू सोई सयान ॥ 104 ॥ करुणा कहतां सुनतां दिन गये, है कछू न आवा । दादू हरि की भक्ति बिन, प्राणी पछतावा ॥ 105 ॥

  • 171 -
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक) · पृष्ठ 171, कुल 504 में से · BharatKosha