सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13 सोइ जन साचे सो सती, सोइ साधक सुजान । सोइ ज्ञानी सोई पंडिता, जे राते भगवान ॥ 162 ॥ दादू सोइ जोगी, सोइ जंगमा, सोइ सूफी सोइ शेख । सोइ सन्यासी, सेवड़ा, दादू एक अलेख ॥ 163 ॥ सोइ काजी सोई मुल्ला, सोइ मोमिन मुसलमान । सोइ सयाने सब भले, जे राते रहमान ॥ 164 ॥ राम नाम को बणिजन बैठे, ताथैं माँड्या हाट । सांई सौं सौदा करैं, दादू खोल कपाट ॥ 165 ॥ अधिकारी अनअधिकारी बिच के सिर खाली करैं, पूरे सुख सन्तोष । दादू सुध बुध आत्मा, ताहि न दीजे दोष ॥ 166 ॥ सुध बुध सौं सुख पाइये, कै साधु विवेकी होइ । दादू ये बिच के बुरे, दाधे रीगे सोइ ॥ 167 ॥ जनि कोई हरि नाम में, हमको हाना बाहि । ताथैं तुमथैं डरत हूँ, क्यों ही टलै बला हि ॥ 168 ॥ परमार्थी जे हम छाड़ैं राम को, तो कौन गहेगा ? दादू हम नहिं उच्चरैं, तो कौन कहेगा ? 169 ॥ विरक्तता एक राम छाड़ै नहीं, छाड़ै सकल विकार । दूजा सहजैं होइ सब, दादू का मत सार ॥ 170 ॥ जे तू चाहै राम को, तो एक मना आराध । दादू दूजा दूर कर, मन इन्द्री कर साध ॥ 171 ॥ विरक्तता कबीर बिचारा कह गया, बहुत भाँति समझाइ । दादू दुनिया बावरी, ताके संग न जाइ ॥ 172 ॥
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