सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-साधु का अंग 15 साधु पारिख लक्षण साधु शिरोमणि शोध ले, नदी पूर पर आइ। संजीवनि साम्हा चढै, दूजा बहिया जाइ ॥ 58 ॥ जिनके मस्तक मणि बसै, सो सकल शिरोमणि अंग। जिनके मस्तक मणि नहीं, ते विष भरे भुवंग ॥ 59 ॥ साधु महिमा दादू इस संसार में, ये द्वै रत्न अमोल। इक सांई अरु संतजन, इनका मोल न तोल ॥ 60 ॥ दादू इस संसार में, ये द्वै रहै लुकाइ। राम स्नेही संतजन, और बहुतेरा आइ ॥ 61 ॥ सगे हमारे साधु हैं, सिर पर सिरजनहार। दादू सतगुरु सो सगा, दूजा धंध विकार ॥ 62 ॥ साधु पारख लक्षण जिनके हिरदै हरि बसै, सदा निरंजन नांऊँ। दादू साचे साध की, मैं बलिहारी जांऊँ ॥ 63 ॥ साचा साधु दयालु घट, साहिब का प्यारा। राता माता राम रस, सो प्राण हमारा ॥ 64 ॥ सज्जन दुर्जन दादू फिरता चाक कुम्हार का, यों दीसे संसार। साधुजन निहचल भये, जिनके राम अधार ॥ 65 ॥ सत्संग महिमा जलती बलती आतमा, साधु सरोवर जाइ। दादू पीवै राम रस, सुख में रहै समाइ ॥ 66 ॥ कृत्तम कर्त्ता कांजी मांहीं भेल कर, पीवै सब संसार। कर्त्ता केवल निर्मला, को साधु पीवणहार ॥ 67 ॥
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