भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-साधु का अंग 15 साधु पारिख लक्षण जे जन हरि के रंग रंगे, सो रंग कदे न जाइ। सदा सुरंगे संत जन, रंग में रहे समाइ ॥ 47 ॥ दादू राता राम का, अविनाशी रंग मांहि। सब जग धोबी धो मरै, तो भी खूटै नांहि ॥ 48 ॥ साहिब किया सो क्यों मिटै, सुन्दर शोभा रंग। दादू धोवैं बावरे, दिन दिन होइ सुरंग ॥ 49 ॥ साधु परमार्थी परमारथ को सब किया, आप स्वार्थ नांहि। परमेश्वर परमार्थी, कै साधु कलि मांहि ॥ 50 ॥ पर उपकारी संत सब, आये इहि क लि मांहि। पीवैं पिलावैं राम रस, आप सवारथ नांहि ॥ 51 ॥ पर उपकारी संत जन, साहिब जी तेरे । जाती देखी आतमा, राम कहि टेरे ॥ 52 ॥ चंद सूर पावक पवन, पाणी का मत सार। धरती अंबर रात दिन, तरुवर फलैं अपार ॥ 53 ॥ छाजन भोजन परमार्थी, आतम देव आधार। साधु सेवक राम के, दादू पर उपकार ॥ 54 ॥ साधु साक्षीभूत जिसका तिसको दीजिये, सुकृत पर उपकार। दादू सेवक सो भला, सिर नहिं लेवे भार ॥ 55 ॥ परमार्थ को राखिये, कीजे पर उपकार। दादू सेवक सो भला, निरंजन निराकार ॥ 56 ॥ सेवा सुकृत सब गया, मैं मेरा मन मांहि। दादू आपा जब लगै, साहिब मानै नांहि ॥ 57 ॥

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