भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-साधु का अंग 15 स्रग न शीतल होइ मन, चन्द न चन्दन पास। शीतल संगति साधु की, कीजे दादू दास ॥ 37 ॥ दादू शीतल जल नहीं, हिम नहिं शीतल होइ। दादू शीतल संत जन, राम सनेही सोइ ॥ 38 ॥ साध बेपरवाही दादू चन्दन कद कह्या, अपना प्रेम प्रकाश। दह दिशि प्रगट है रह्या, शीतल गंध सुवास ॥ 39 ॥ दादू पारस कद कह्या, मुझ थीं कंचन होइ। पारस परगट है रह्या, साच कहै सब कोइ ॥ 40 ॥ नरबिड़ रूप हठीजन तन नहिं भूला, मन नहिं भूला, पंच न भूला प्राण। साधु सबद क्यूँ भूलिये, रे मन मूढ अजाण ॥ 41 ॥ साधु महिमा रत्न पदारथ माणिक मोती, हीरों का दरिया। चिंतामणि चित रामधन, घट अमृत भरिया ॥ 42 ॥ समर्थ शूरा साधु सो, मन मस्तक धरिया। दादू दर्शन देखतां, सब कारज सरिया ॥ 43 ॥ साधु महिमा महात्म धरती अम्बर रात दिन, रवि शशि नावैं शीश। दादू बलि बलि वारणें, जे सुमिरैं जगदीश ॥ 44 ॥ चन्द सूर सिजदा करैं, नाम अलह का लेइ। दादू जमीं आस्मान सब, उन पावों सिर देइ ॥ 45 ॥ जे जन राते राम सौं, तिनकी मैं बलि जांव। दादू उन पर वारणे, जे लाग रहे हरि नांव ॥ 46 ॥

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