सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 196, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-साधु का अंग 15 दादू ऊरा पूरा कर लिया, खारा मीठा होइ । फूटा सारा कर लिया, साधु विवेकी सोइ ॥ 122 ॥ बंध्या मुक्ता कर लिया, उरझ्या सुरझ समान । बैरी मिंता कर लिया, दादू उत्तम ज्ञान ॥ 123 ॥ झूठा साचा कर लिया, काँचा कंचन सार । मैला निर्मल कर लिया, दादू ज्ञान विचार ॥ 124 ॥ अमिट पाप प्रचंड दादू काया कर्म लगाइ कर, तीर्थ धोवै आइ । तीर्थ मांही कीजिए, सो कैसे कर जाइ ॥ 125 ॥ जहँ तिरिये तहँ डूबिये, मन में मैला होइ । जहाँ छूटे तहँ बंधिये, कपट न सीझे कोइ ॥ 126 ॥ सत्संग महिमा दादू जब लग जीविये, सुमिरण संगति साध । दादू साधू राम बिन, दूजा सब अपराध ॥ 127 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुबुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य पन्द्रहवां साधु काअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 15 ॥ साखी 127 ॥
- 196 -