भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

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मध्य का अंग www.dadooram.org अथ मध्य का अंग १६ मंगलाचरण दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः । वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ॥ 1 ॥ मध्य निष्पक्ष दादू द्वै पख रहिता सहज सो, सुख दुख एक समान। मरै न जीवै सहज सो, पूरा पद निर्वाण ॥ 2 ॥ सहज रूप मन का भया, जब द्वै द्वै मिटी तरंग। ताता शीला सम भया, तब दादू एकै अंग ॥ 3 ॥

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