सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-विचार का अंग 18 दादू दिन दिन भूलै देह गुण, दिन दिन इंद्रिय नाश। दिन दिन मन मनसा मरै, दिन दिन होइ प्रकाश ॥ 26 ॥ सजीवन देह रहै संसार में, जीव राम के पास। दादू कुछ व्यापै नहीं, काल झाल दुख त्रास ॥ 27 ॥ काया की संगति तजै, बैठा हरि पद मांहि। दादू निर्भय ह्वै रहै, कोई गुण व्यापै नांहि ॥ 28 ॥ काया मांही भय घणा, सब गुण व्यापैं आइ। दादू निर्भय घर किया, रहे नूर में जाइ ॥ 29 ॥ खड्ग धार विष ना मरै, कोइ गुण व्यापै नांहि। राम रहै त्यों जन रहै, काल झाल जल मांहि ॥ 30 ॥ विचार सहज विचार सुख में रहै, दादू बड़ा विवेक। मन इन्द्रिय पसरै नहीं, अंतर राखै एक ॥ 31 ॥ मन इन्द्रिय पसरै नहीं, अहर्निशि एकै ध्यान। पर उपकारी प्राणिया, दादू उत्तम ज्ञान ॥ 32 ॥ उभय असभाव दादू मैं नाहीं तब नाम क्या, कहा कहावै आप? साधो ! कहो विचार कर, मेटहु तन की ताप ॥ 33 ॥ जब समझ्या तब सुरझिया, उलट समाना सोइ। कछु कहावै जब लगै, तब लग समझ न होइ ॥ 34 ॥ जब समझ्या तब सुरझिया, गुरुमुख ज्ञान अलेख। ऊर्ध्व कमल में आरसी, फिर कर आपा देख ॥ 35 ॥ दादू आपा उरझे उरझिया, दीसे सब संसार। आपा सुरझे सुरझिया, यहु गुरु ज्ञान विचार ॥ 36 ॥
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