सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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श्री दादूवाणी-विचार का अंग 18 जो मति पीछे ऊपजै, सो मति पहली होइ। कबहुं न होवै जीव दुखी, दादू सुखिया सोइ ॥ 49 ॥ आदि अन्त गाहन किया, माया ब्रह्म विचार। जहँ का तहँ ले दे धऱ्या, दादू देत न बार ॥ 50 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य अठरहवां विचार काअंग सम्पूर्ण ।। अंग 18 ।। साखी 50 ।।
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