भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 238, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-जीवित मृतकका अंग 23 दादू आपा मेटे एक रस, मन हि स्थिर लै लीन। अरस परस आनन्द कर, सदा सुखी सो दीन ॥ 49 ॥ स्मरण नाम निस्संशय हम्हीं हमारा कर लिया, जीवित करणी सार। पीछे संशय को नहीं, दादू अगम अपार ॥ 50 ॥ मध्य निरपक्ष माटी मांहि ठौर कर, माटी माटी मांहि। दादू सम कर राखिये, द्वै पख दुविधा नांहि ॥ 51 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य तेईसवां जीवत मृतक काअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 23 ॥ साखी 51 ॥

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