सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-जीवित मृतकका अंग 23 तन मन मैदा पीसकर, छांण छांण ल्यौ लाइ । यों बिन दादू जीव का, कबहुँ साल न जाइ ॥ 38 ॥ पीसे ऊपर पीसिये, छांणे ऊपर छांण । तो आत्म कण ऊबरै, दादू ऐसी जाण ॥ 39 ॥ पहली तन मन मारिये, इनका मर्दै मान । दादू काढै जंत्र में, पीछे सहज समान ॥ 40 ॥ काटे ऊपर काटिये, दाधे को दौं लाइ । दादू नीर न सींचिये, तो तरुवर बधता जाइ ॥ 41 ॥ दादू सबको संकट एक दिन, काल गहैगा आइ । जीवित मृतक ह्वै रहै, ताके निकट न जाइ ॥ 42 ॥ दादू जीवित मृतक ह्वै रहै, सबको विरक्त होइ । काढ़ो काढ़ो सब कहैं, नाम न लेवै कोइ ॥ 43 ॥ जरणा सारा गहिला ह्वै रहै, अन्तरयामी जाणि । तो छूटै संसार तैं, रस पीवै सारंगपाणि ॥ 44 ॥ गूँगा गहिला बावरा, सांई कारण होइ । दादू दीवाना ह्वै रहै, ताको लखै न कोइ ॥ 45 ॥ जीवत मृतक जीवित मृतक साधु की, वाणी का परकास । दादू मोहे रामजी, लीन भये सब दास ॥ 46 ॥ दादू जे तूं मोटा मीर है, सब जीवों में जीव । आपा देख न भूलिये, खरा दुहेला पीव ॥ 47 ॥ आपा मेट समाइ रहु, दूजा धंधा बाद । दादू काहे पच मरै, सहजैं सुमिरण साध ॥ 48 ॥
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