सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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श्री दादूवाणी-मंगलाचरण स्वामीजी सिर ऊपरे, स्वामीजी उर मांहि । स्वामी दादू सारिसा, सुन्दर दूजा नाहिं ॥ 10 ॥ स्वामी दादू दीनदयाल सा, नजर न आया कोय । घडसी सारी मांड में, कर्ता करे सो होय ॥ 11 ॥ सब संतन सौं बीनती, जे सुमिरें जगदीस । हरि गुरु हिरदै में, बसो और हमारे शीश ॥ 12 ॥ हरि वन्दन गुरु रीझहीं, गुरु वन्दन सुख राम । जगन्नाथ हरि गुरु खुशी, करियो जन परनाम ॥ 13 ॥ सदा हमारे रामजी, गुरु गोविंदजी सहाय । जन रज्जब जोख्यों नहीं, विघ्न विलय होय जाय ॥ 14 ॥ नाम लेत नव ग्रह टरें, भजन करत भय जाय । जगजीवन अजपा जपें, सबही विघ्न विलाय ॥ 15 ॥ विघ्न बचें हरि नाम सौं, व्याधि विकार विलाय । ऐसा शरणा नाम का, सब दुख सहजैं जाय ॥ 16 ॥
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