सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-मंगलाचरण आदि अंत हरि सेवही, मिल सबही साधू । इन रागन में पद किये, श्री सतगुरु-दादू ॥ 7 ॥ अंग-रागन का जोड़ यह, महानन्द गाया । गुरु-दादू परसाद तैं, हरि हिरदै पाया ॥ 8 ॥ मंगलाचरण दादू नमो नमो निरञ्जनं, नमस्कार गुरु देवतः । वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगतः ॥ 1 ॥ परब्रह्म परापरं, सो मम् देव निरंजनम् । निराकारं निर्मलं, तस्य दादू वन्दनम् ॥ 2 ॥ गुरुब्रह्मा गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परंब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः॥ 3 ॥ अखण्डमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरं । तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरवे नमः॥ 4 ॥ केशराम्बरधरं स्वामी, नूर तेज सुधामयम् । दादू दयालु दया कृत्यं, सर्व विघ्न विनाशन् ॥ 5 ॥ काश्मीर रंजितं वस्त्रं, गौरवर्णं शशीप्रभम् । दधानं श्रीगुरुंदादूं, वंदे कारण विग्रहम् ॥ 6 ॥ जो प्रभु जग में ज्योतिर्मय, कारण करण अभेव । विघ्न हरण मंगलकरण, श्री नमो निरंजन देव ॥ 7 ॥ स्वामी दादू सुमिरिये, गहिये निर्मल ज्ञान । मनसा वाचा कर्मणा, सुन्दर धरिये ध्यान ॥ 8 ॥ स्वामी दादू ब्रह्म है, फेर सार नहिं कोय । सुन्दर ताकों सुमिरतां, सब सिध कारज होय ॥ 9 ॥
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